अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
रायपुर में UCC ड्राफ्टिंग समिति के साथ अधिवक्ताओं की अहम बैठक, विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर रखे सुझाव
“एक विधान, सबके लिए सम्मान” की भावना के अनुरूप कानून बनाने पर जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कानूनी और संवैधानिक स्तर पर विचार-विमर्श का दौर तेज होता दिखाई दे रहा है। राजधानी रायपुर के सर्किट हाउस में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने UCC के लिए गठित ड्राफ्टिंग समिति के समक्ष कई सुझाव और कानूनी बिंदु रखे।
बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि प्रस्तावित कानून संविधान की मूल भावना के अनुरूप हो और समाज के अलग-अलग वर्गों के अधिकारों तथा हितों के बीच संतुलन कायम करे।
संविधान की कसौटी पर तैयार हो मसौदा
अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए UCC का प्रारूप तैयार किया जाना चाहिए। विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों की सामाजिक परिस्थितियों और प्रचलित व्यवस्थाओं को समझते हुए व्यापक कानूनी विमर्श की आवश्यकता बताई गई।
प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के अधिकार, उत्तराधिकार, विवाह, तलाक और भरण-पोषण जैसे विषयों पर व्यावहारिक एवं समानता आधारित प्रावधानों पर विचार करने का सुझाव दिया गया।
अलग-अलग कानूनी पहलुओं पर हुई चर्चा
बैठक में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दिनेश देवांगन और भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक बृजेश पांडे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने समिति के सामने अपने विचार रखे। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी, अधिवक्ता संघ के सचिव राकेश पुरी और उपाध्यक्ष भारती राठौर सहित अन्य अधिवक्ताओं ने भी चर्चा में भाग लिया।
प्रतिनिधिमंडल ने विवाह, संपत्ति, उत्तराधिकार और संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों को लेकर सुझाव दिए। अधिवक्ताओं का कहना था कि किसी भी नए कानूनी ढांचे की भाषा स्पष्ट और व्यवहारिक होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों के लिए उसे समझना आसान हो और इसके क्रियान्वयन में अनावश्यक कानूनी जटिलताएं न बढ़ें।
महिलाओं के अधिकार और समानता पर विशेष जोर
विचार-विमर्श के दौरान यह भी कहा गया कि प्रस्तावित कानून में किसी व्यक्ति के अधिकारों का निर्धारण केवल उसके वर्ग या समुदाय के आधार पर न हो। महिलाओं को विवाह, तलाक, संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में समान और प्रभावी कानूनी अधिकार देने की दिशा में प्रावधानों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
समिति ने सुझावों पर विचार का दिया भरोसा
बैठक में रखे गए सुझावों और कानूनी आपत्तियों को UCC ड्राफ्टिंग समिति द्वारा गंभीरता से सुने जाने की बात कही गई। समिति की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि अंतिम मसौदा तैयार करते समय प्राप्त कानूनी एवं सामाजिक सुझावों पर विचार किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर समिति की बैठकों और परामर्श प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ इस विषय पर राजनीतिक और कानूनी चर्चा भी तेज होने की संभावना है। हालांकि अंतिम प्रारूप और उसके प्रावधानों को लेकर तस्वीर समिति की आगामी प्रक्रिया और सरकार के निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगी।


