अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
बी-1, खसरा और खतौनी रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की कवायद तेज, मोबाइल अलर्ट और ऑनलाइन रिकॉर्ड से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद
बिलासपुर। जमीन से जुड़े दस्तावेजों में पारदर्शिता बढ़ाने और राजस्व रिकॉर्ड को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बी-1, खसरा और खतौनी जैसे भूमि अभिलेखों को डिजिटल पहचान और मोबाइल नंबर से जोड़ने की व्यवस्था का उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड में होने वाले बदलावों की जानकारी संबंधित भू-स्वामी तक तेजी से पहुंचाना और रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितताओं की संभावना को कम करना है।
रिकॉर्ड में बदलाव पर मिल सकता है मोबाइल अलर्ट
प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था के तहत भूमि रिकॉर्ड में नामांतरण, बंधक या अन्य महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज होने पर पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे जमीन मालिक अपने रिकॉर्ड में होने वाले बदलावों पर पहले की तुलना में अधिक आसानी से नजर रख सकेंगे।
फर्जीवाड़े पर नियंत्रण की उम्मीद
जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल पहचान से जोड़ने का एक प्रमुख उद्देश्य भूमि संबंधी दस्तावेजों की विश्वसनीयता बढ़ाना है। यदि संबंधित सेवाओं में आधार आधारित ई-केवाईसी, ओटीपी या अन्य प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू की जाती है, तो गलत पहचान के आधार पर किए जाने वाले प्रयासों पर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
हालांकि, जमीन की बिक्री, रजिस्ट्री और नामांतरण के लिए कौन-सी प्रमाणीकरण प्रक्रिया अनिवार्य होगी, यह संबंधित राज्य सरकार की आधिकारिक अधिसूचना और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
पटवारी कार्यालय के चक्कर कम होने की उम्मीद
डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से भू-स्वामियों को बी-1 और खसरा जैसे दस्तावेजों की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त करने में सुविधा मिल सकती है। इससे छोटे-छोटे राजस्व दस्तावेजों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।
पैतृक संपत्ति के विवादों में भी मददगार हो सकती है डिजिटल व्यवस्था
भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन और नियमित रूप से अपडेट होने से नामांतरण, स्वामित्व और पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट रखने में मदद मिल सकती है। इससे सीमांकन, बंटवारे और स्वामित्व संबंधी विवादों में दस्तावेजों की जांच आसान होने की संभावना है।
भू-स्वामियों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
जमीन मालिकों को अपने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाम, खसरा नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए। यदि किसी सरकारी पोर्टल या सेवा केंद्र के माध्यम से ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को आधिकारिक माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति को आधार की जानकारी, ओटीपी या अन्य संवेदनशील विवरण साझा नहीं करना चाहिए।
डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता, लेकिन आधिकारिक नियम जरूरी
भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल रूपांतरण निश्चित रूप से राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि, इसे पूरी तरह लागू व्यवस्था मानने से पहले संबंधित राज्य सरकार या राजस्व विभाग की आधिकारिक अधिसूचना और लागू नियमों की पुष्टि जरूरी होगी।
डिजिटल व्यवस्था से जमीन मालिकों को अपने रिकॉर्ड पर बेहतर निगरानी मिल सकती है, लेकिन किसी भी तरह के फर्जीवाड़े पर पूर्ण रोक का दावा तभी किया जा सकेगा जब नई व्यवस्था के सभी प्रावधान आधिकारिक रूप से लागू हो जाएं।


