अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
सीवीओ हिमांशु जैन ने नीतियों और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता पर दिया जोर
बिलासपुर। एसईसीएल के तीन माह लंबे सतर्कता जागरूकता अभियान-2026 के अंतर्गत एमडीआई, बिलासपुर में पब्लिक प्रोक्योरमेंट विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी खरीद से जुड़ी नीतियों, नियमों और प्रक्रियाओं की बेहतर समझ देना तथा खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करना है।
एमएसई और मेक इन इंडिया की नीतियों पर विशेष सत्र
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में एसईसीएल के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) हिमांशु जैन ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) से संबंधित सार्वजनिक खरीद नीति तथा ‘मेक इन इंडिया’ से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में इन नीतिगत प्रावधानों का सही तरीके से पालन करना आवश्यक है। इससे छोटे उद्यमों को खरीद प्रक्रिया में अवसर मिलने के साथ देश में निर्मित उत्पादों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
पारदर्शी और निष्पक्ष खरीद प्रक्रिया पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुपालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। खरीद प्रक्रिया में नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर व्यावहारिक जानकारी भी साझा की गई।
वास्तविक मामलों से समझाई गईं संभावित चूक
सीवीओ हिमांशु जैन ने वास्तविक मामलों का उदाहरण देते हुए पब्लिक प्रोक्योरमेंट के दौरान सामने आने वाली सामान्य गलतियों और संभावित जोखिमों को समझाया। उन्होंने प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में आवश्यक जांच-पड़ताल और सावधानी बरतने की जरूरत बताई, ताकि किसी भी प्रक्रियागत कमी को समय रहते सुधारा जा सके।
सवाल-जवाब के जरिए दूर की गईं शंकाएं
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने सार्वजनिक खरीद से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं और एमएसई तथा ‘मेक इन इंडिया’ के प्रावधानों को लागू करने से संबंधित सवाल रखे। अधिकारियों ने प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान करते हुए आवश्यक जानकारी साझा की।
सतर्कता व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
एसईसीएल में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रिवेंटिव विजिलेंस को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनाना तथा प्रक्रियागत कमियों की संभावना को कम करना है।
