कागजों पर 8 मंजिल, जमीन पर 9वीं पर भी 14 फ्लैट: बिल्डिंग निर्माण पर उठे सवाल, निगम की निगरानी पर भी सवालिया निशान

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विशेष पड़ताल: तय अनुमति से अतिरिक्त मंजिल और 14 फ्लैट बनाने के आरोप, निर्माण की वैधता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

रायगढ़/बिलासपुर। शहर के रियल एस्टेट कारोबार में बहुमंजिला निर्माण को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें स्वीकृत नक्शे और मौके पर मौजूद निर्माण के बीच अंतर होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित प्रोजेक्ट को कागजों पर ग्राउंड समेत कुल 8 मंजिलों के निर्माण की अनुमति मिली थी, जबकि मौके पर नौवीं मंजिल का निर्माण किए जाने और इस अतिरिक्त मंजिल पर 14 फ्लैट बनाए जाने का दावा किया जा रहा है। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला भवन निर्माण नियमों और स्वीकृत अनुमति के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।

स्वीकृति 8 मंजिल की, निर्माण 9वीं मंजिल तक पहुंचने का दावा

बताया जा रहा है कि संबंधित भवन के लिए निर्धारित फ्लोर एरिया रेश्यो (FAR), भवन की ऊंचाई और अन्य तकनीकी मानकों के आधार पर निर्माण की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि स्वीकृत सीमा से आगे बढ़कर नौवीं मंजिल का ढांचा तैयार किया गया और वहां 14 अतिरिक्त फ्लैट भी बनाए गए। इस निर्माण की वास्तविक स्थिति और इसकी वैधता अब जांच का विषय है।

14 अतिरिक्त फ्लैट को लेकर उठे सवाल

यदि किसी भवन में स्वीकृत मंजिलों से अतिरिक्त निर्माण किया गया है, तो उस पर बने फ्लैटों की वैधानिक स्थिति भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में निर्माण की अनुमति, स्वीकृत नक्शे और मौके पर किए गए वास्तविक निर्माण का मिलान किए जाने की जरूरत है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि अतिरिक्त निर्माण के संबंध में संबंधित नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कोई अनुमति ली गई थी या नहीं।

निर्माण के दौरान निगरानी व्यवस्था पर सवाल

इस मामले में नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा और मैदानी अमले की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि भवन में आठवीं मंजिल के बाद नौवीं मंजिल का निर्माण किया गया, तो निर्माण के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा इसका निरीक्षण किया गया था या नहीं, यह भी जांच का विषय है। खास तौर पर भवन की ऊंचाई और स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण की स्थिति की निगरानी किस स्तर पर की गई, इसका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

खरीदारों के हितों को लेकर भी चिंता

अतिरिक्त निर्माण की स्थिति में संभावित खरीदारों के हितों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यदि किसी फ्लैट का निर्माण स्वीकृत नक्शे या वैधानिक अनुमति के विपरीत हुआ है, तो भविष्य में उसकी बिक्री, रजिस्ट्री, बैंक ऋण और स्वामित्व संबंधी मामलों में खरीदारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए किसी भी खरीदार के लिए संबंधित परियोजना का स्वीकृत नक्शा और निर्माण की वैधानिक स्थिति जांचना बेहद महत्वपूर्ण है।

अब जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर

मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि संबंधित भवन के स्वीकृत नक्शे और मौके पर हुए निर्माण का आधिकारिक सत्यापन कब कराया जाएगा। क्या नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करेंगे कि नौवीं मंजिल और 14 अतिरिक्त फ्लैट स्वीकृत हैं या नहीं? यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत क्या कार्रवाई होगी, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

यह मामला केवल एक भवन के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में बहुमंजिला इमारतों की स्वीकृति, निर्माण की निगरानी और भवन नियमों के पालन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग जांच के बाद क्या तथ्य सामने लाते हैं और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर क्या कार्रवाई की जाती है।

अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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