जंगल के भीतर ताजा कटे ठूंठ और लकड़ी के लट्ठे मिलने का दावा, ग्रामीणों ने रात में ट्रैक्टरों की आवाजाही का लगाया आरोप
बिलासपुर/कोटा। बिलासपुर वनमंडल के कोटा परिक्षेत्र में सागौन के पेड़ों की कथित अवैध कटाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बेलगहना सर्कल के अंतर्गत आने वाले कई गांवों के जंगलों में बड़े पेड़ों की कटाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से जंगल के भीतर लकड़ी काटकर उसे छिपाया जा रहा है और रात के समय वाहनों के जरिए बाहर ले जाने की गतिविधियां होती हैं।

ग्रामीणों के इन आरोपों ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अवैध कटाई और वन अमले की संलिप्तता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
सात गांवों के जंगलों पर नजर
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बेलगहना सर्कल के केकराडी, करही कछार, बेलगहना, बहेरामुड़ा, कुरदर, टेगनमाड़ा और करवा क्षेत्र में सागौन की कटाई की शिकायतें सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के कुछ हिस्सों में पुराने और बड़े सागौन के पेड़ों को काटे जाने के निशान दिखाई दे रहे हैं। उनका आरोप है कि यह गतिविधि पिछले कुछ समय से लगातार जारी है।

जंगल के अंदर मिले कटाई के निशान
जंगल के अंदर से सामने आई तस्वीरों और स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए स्थानों के आधार पर कुछ जगहों पर ताजा कटे पेड़ों के ठूंठ और लकड़ी के अवशेष दिखाई देने की बात कही जा रही है।
कुछ स्थानों पर पेड़ों को काटकर बड़े लट्ठों में तैयार किए जाने और उन्हें झाड़ियों के बीच छिपाकर रखने का दावा भी किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, कई जगहों पर एक साथ कई लट्ठे जमा किए जाते हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि उन्हें बाद में जंगल से बाहर ले जाने की तैयारी होती है।
इन दावों की वास्तविक स्थिति और लकड़ी की मात्रा की पुष्टि वन विभाग की आधिकारिक जांच और मौके के पंचनामा से ही हो सकेगी।
रात में ट्रैक्टरों की आवाजाही का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दिन ढलने के बाद जंगल के आसपास ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही बढ़ जाती है। उनका दावा है कि काटी गई लकड़ी को रात के समय जंगल से बाहर ले जाने की कोशिश की जाती है।
यदि इन आरोपों में तथ्य है तो यह वन सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। ऐसे में वन विभाग की गश्त, नाकेबंदी और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
ग्रामीणों ने उठाए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य ग्रामीणों द्वारा सूखी लकड़ी एकत्र करने पर वन कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है, लेकिन यदि बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों की कटाई और परिवहन हो रहा है तो उस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि जंगल में लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं और लकड़ी का परिवहन हो रहा है, तो संबंधित क्षेत्र में तैनात वनकर्मियों की नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई जानकारी?
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि स्थानीय स्तर पर लंबे समय से अवैध कटाई की शिकायतें मिल रही थीं, तो क्या संबंधित वन अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो निगरानी तंत्र की स्थिति क्या है?
इन सवालों का जवाब वन विभाग की जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेगा।
DFO से जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने बिलासपुर वनमंडलाधिकारी से मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बेलगहना सर्कल के संबंधित जंगलों में विशेष टीम भेजकर सघन निरीक्षण कराया जाए।
इसके साथ ही जंगल में यदि अवैध रूप से काटी गई लकड़ी या छिपाकर रखे गए लट्ठे मिलते हैं तो उन्हें जब्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने संबंधित बीट गार्ड, डिप्टी रेंजर और रेंजर की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
जंगल बचाने के लिए निगरानी मजबूत करने की जरूरत
सागौन जैसे मूल्यवान वृक्षों की अवैध कटाई केवल वन संपदा का नुकसान नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी पड़ता है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई के साथ जंगलों की नियमित निगरानी मजबूत करना जरूरी है।
फिलहाल बेलगहना सर्कल के सात गांवों में सागौन कटाई को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब नजर इस बात पर है कि वन विभाग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में किन तथ्यों का खुलासा होता है।
विशेष जांच रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर, बिलासपुर




