मुख्यमंत्री के पीएसओ के निजी कार्यक्रम पर सरकारी तंत्र की सक्रियता, जनता पूछ रही—हमारे क्षेत्र के विकास की बारी कब?

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बलरामपुर/राजपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 26 अगस्त को राजपुर विकासखंड के ग्राम कर्रा में आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ एवं शिव महापुराण कथा में शामिल हुए। स्थानीय स्तर पर इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री के पीएसओ से जुड़ा निजी आयोजन बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला करीब 10 दिनों से तैयारियों में जुटा रहा। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने कई बार कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

निजी आयोजन के लिए प्रशासनिक संसाधनों की तैनाती पर सवाल

मुख्यमंत्री सचिवालय के कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से कर्रा पहुंचे और धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, हेलीपैड, मार्ग निरीक्षण और अन्य व्यवस्थाओं के लिए प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय रही।

सुरक्षा और प्रोटोकॉल मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रशासन की अनिवार्य जिम्मेदारी है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि कार्यक्रम निजी प्रकृति का था, तो प्रशासनिक संसाधनों और कर्मचारियों की व्यापक तैनाती किस आधार पर की गई। लोगों का कहना है कि इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

पत्रकारों को औपचारिक निमंत्रण नहीं मिलने की चर्चा

मुख्यमंत्री के आगमन जैसे बड़े कार्यक्रम को लेकर स्थानीय पत्रकारों के बीच भी चर्चा रही। क्षेत्र के कुछ पत्रकारों के अनुसार उन्हें भाजपा संगठन, प्रशासन या आयोजन समिति की ओर से औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला। पत्रकारों का सवाल है कि जब मुख्यमंत्री स्वयं कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, तो स्थानीय मीडिया को कार्यक्रम की जानकारी और आमंत्रण से दूर क्यों रखा गया।

करोड़ों के खर्च की चर्चाएं, लेकिन आधिकारिक जानकारी नहीं

कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में कथित करोड़ों रुपये के खर्च की चर्चा भी हो रही है। मंच, पंडाल, पार्किंग, हेलीपैड, सड़क मरम्मत, साफ-सफाई और सुरक्षा सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, खर्च की वास्तविक राशि, भुगतान और उसके स्रोत को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में करोड़ों रुपये के खर्च के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

जनता पूछ रही—विकास कार्यों को कब मिलेगी ऐसी प्राथमिकता?

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि आयोजन में सरकारी संसाधनों, कर्मचारियों या सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का खर्च निजी था, सरकारी था या दोनों का मिश्रित स्वरूप था।

लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, वहां यदि प्रशासन इतने कम समय में बड़े स्तर पर व्यवस्थाएं कर सकता है तो विकास कार्यों के लिए भी ऐसी ही तत्परता दिखाई जानी चाहिए।

बदहाल सड़कों से जूझ रही जनता

कार्यक्रम की तैयारियों के बीच बलरामपुर जिले की जर्जर सड़कों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अंबिकापुर से राजपुर और राजपुर से रामानुजगंज तक सड़क की स्थिति को लेकर स्थानीय लोग लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं। बरसात के दौरान जगह-जगह गड्ढों और जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित होने की बात सामने आती रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार खराब सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और कई बार यातायात भी प्रभावित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुधार की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।

पारदर्शिता से दूर हो सकते हैं सवाल

सार्वजनिक धन और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वाभाविक है। ऐसे में यदि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सरकारी संसाधनों का उपयोग हुआ है तो प्रशासन द्वारा खर्च और व्यवस्था की प्रकृति स्पष्ट किए जाने से स्थिति साफ हो सकती है।

अब स्थानीय जनता का सवाल यही है कि जिस तत्परता से वीआईपी कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हुई, क्या उसी स्तर की प्राथमिकता सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी विकास कार्यों को भी मिलेगी?

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