बिलासपुर। बिलासपुर तहसील कार्यालय में राजस्व मामलों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ई-राजस्व कोर्ट व्यवस्था के बावजूद मोपका और जूना बिलासपुर क्षेत्र से जुड़े कुछ राजस्व प्रकरणों को ऑफलाइन फाइलों के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, 22 जुलाई से नकल शाखा बंद होने के दावे के चलते आम लोगों को खसरा-बी1, आदेश की प्रतियां और अन्य जरूरी राजस्व दस्तावेज हासिल करने में परेशानी होने की बात सामने आई है।
ऑफलाइन फाइलिंग को लेकर उठे सवाल
शासन की डिजिटल व्यवस्था के तहत राजस्व प्रकरणों को ऑनलाइन दर्ज करने और उनकी स्थिति को पारदर्शी बनाए रखने की व्यवस्था है। आरोप है कि मोपका और जूना बिलासपुर क्षेत्र के कुछ मामलों की ई-कोर्ट पोर्टल पर प्रविष्टि नहीं की गई। इससे संबंधित पक्षकारों को प्रकरण की स्थिति, पेशी और आदेश की जानकारी ऑनलाइन हासिल करने में परेशानी हो रही है।
नामांतरण और सीमांकन मामलों में देरी के आरोप
तहसील में नामांतरण, फौती, खाता विभाजन और सीमांकन जैसे मामलों में अनावश्यक देरी के आरोप भी सामने आए हैं। कुछ पक्षकारों का आरोप है कि उनकी फाइलें लंबे समय से लंबित हैं, जबकि कथित रूप से प्रभाव या लेन-देन के जरिए मामलों के जल्द निपटारे की चर्चा होती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
22 जुलाई से नकल शाखा बंद होने का दावा
तहसील कार्यालय की नकल शाखा को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि 22 जुलाई से शाखा में कामकाज प्रभावित है, जिसके कारण आदेश की प्रतियां, खसरा-बी1 और अन्य जरूरी राजस्व दस्तावेज प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। इससे बैंक लोन, न्यायालयीन मामलों और रजिस्ट्री से जुड़े कार्य प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
उच्चाधिकारियों से शिकायत की तैयारी
मामले से परेशान पक्षकार अब बिलासपुर कलेक्टर और मुख्यमंत्री सचिवालय तक शिकायत करने की तैयारी में हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे संबंधित प्रकरणों और कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों के साथ जांच की मांग करेंगे।
जांच से ही साफ होगी वास्तविक स्थिति
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में ई-कोर्ट व्यवस्था के समानांतर ऑफलाइन फाइलों का संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा है और नकल शाखा लंबे समय से बंद है या नहीं। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत होगी। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अभिषेक कुमार पाण्डेय, रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़


