रिपोर्ट अभिषेक कुमार पाण्डेय
संवाददाता, बिलासपुर छत्तीसगढ़
20/08/26
बिलासपुर। बाढ़ एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों की तैयारियों को परखने के लिए कोटा के कोरी डेम में मॉक एक्सरसाइज आयोजित किया गया। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह की मौजूदगी में हुए इस अभ्यास में होमगार्ड और एसडीआरएफ की टीमों ने हिस्सा लिया। जवानों ने बाढ़ में फंसे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने की पूरी प्रक्रिया का हूबहू प्रदर्शन किया।
बाढ़ में फंसे व्यक्ति के रेस्क्यू का किया प्रदर्शन
मॉक एक्सरसाइज के दौरान आपदा की काल्पनिक स्थिति निर्मित की गई। सूचना मिलने से लेकर राहत एवं बचाव दल के घटनास्थल तक पहुंचने, स्थिति का आकलन करने, बचाव उपकरणों के इस्तेमाल और बाढ़ में फंसे व्यक्ति को सुरक्षित निकालने तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
एसडीआरएफ और होमगार्ड के जवानों ने डेम के जलक्षेत्र में उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। इस दौरान टीमों के बीच आपसी समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और उपलब्ध संसाधनों की उपयोगिता को भी परखा गया।
बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई
मौके पर विभिन्न प्रकार के बचाव एवं आपदा प्रबंधन उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने उपकरणों का अवलोकन किया और उनके उपयोग की जानकारी ली। अधिकारियों ने रेस्क्यू टीम के जवानों से उपकरणों के संचालन और आपात स्थिति में उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया के संबंध में भी जानकारी ली।
कलेक्टर ने कहा- समय पर प्रतिक्रिया से बचती है जान
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन में समय पर प्रतिक्रिया और सही तरीके से किया गया बचाव कार्य जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाढ़ की स्थिति में प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, होमगार्ड और स्थानीय अमले के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मॉक एक्सरसाइज का उद्देश्य वास्तविक आपदा के दौरान आने वाली संभावित चुनौतियों को पहले से पहचानना और तैयारियों को मजबूत करना है। उन्होंने संबंधित टीमों को संसाधनों और उपकरणों को हमेशा तैयार रखने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
एसएसपी ने नियमित अभ्यास को बताया जरूरी
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि बाढ़ या किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। वास्तविक घटनाओं में परिस्थितियां कई बार चुनौतीपूर्ण होती हैं, इसलिए नियमित अभ्यास से जवानों को विपरीत परिस्थितियों में बेहतर ढंग से काम करने का अनुभव मिलता है।
उन्होंने बताया कि मॉक एक्सरसाइज के जरिए टीमों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और रेस्क्यू ऑपरेशन की व्यवहारिक क्षमता को परखा गया। उन्होंने जवानों को आपदा के समय धैर्य, सतर्कता और पूरी सावधानी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
आपदा के समय संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर
अभ्यास के दौरान यह भी देखा गया कि जलभराव या बाढ़ में फंसे लोगों तक राहत दल कितनी तेजी से पहुंच सकता है और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है। अधिकारियों ने अभ्यास के दौरान सामने आए विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और आपदा की स्थिति में किसी भी प्रकार की कमी न रहे, इसके लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
अधिकारी और बचाव दल रहे मौजूद
इस अवसर पर अपर कलेक्टर ज्योति पटेल, एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह, होमगार्ड के डीआईजी एलपी वर्मा, डिवीजनल कमांडेंट होमगार्ड नरसिंह नेताम, एसडीएम प्रवेश पैकरा, डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड एवं एसडीआरएफ दीपांकुर नाथ, डिप्टी कलेक्टर भवानी साव एवं सालिकराम गुप्ता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बचाव दल के जवान मौजूद रहे।
मॉक एक्सरसाइज के जरिए आपदा के समय त्वरित, सुरक्षित और समन्वित राहत-बचाव कार्रवाई के लिए प्रशासन और बचाव दल की तैयारियों को व्यवहारिक रूप से परखा गया।




