कोरबा। ग्राम पंचायत सरगबुंदिया में सचिव गीतेन्द्र कुमार जायसवाल की पुनः पदस्थापना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन सौंपकर वर्ष 2020 से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं, पंचायत अभिलेखों के प्रभार, मजदूरी भुगतान और अन्य शिकायतों का हवाला देते हुए पदस्थापना पर आपत्ति जताई है।
पुराने आरोपों की जांच को लेकर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि गीतेन्द्र कुमार जायसवाल वर्ष 2014 से 2020 तक सरगबुंदिया पंचायत में सचिव के पद पर कार्यरत रहे। उनके कार्यकाल को लेकर पूर्व में कई शिकायतें किए जाने का दावा आवेदन में किया गया है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक कुछ शासकीय योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्य अधूरे रहने और निर्माण कार्यों की राशि को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
₹12.50 लाख और ₹8 लाख के आहरण का मामला
शिकायत में वर्ष 2020 के दो कथित वित्तीय मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार 13 जनवरी 2020 को ₹12,00,500 और 3 फरवरी 2020 को ₹8,00,000 के कथित आहरण को लेकर तत्कालीन सरपंच एवं पंचों की ओर से शिकायत की गई थी।
ग्रामीणों का दावा है कि इन मामलों की जांच अब तक लंबित है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पंचायत अभिलेखों के प्रभार पर भी उठे सवाल
सरपंच एवं ग्रामीणों ने पंचायत के पुराने दस्तावेजों के प्रभार को लेकर भी आपत्ति जताई है। आवेदन में पंचायत बैठक पंजी, ग्रामसभा कार्यवाही पंजी, कैशबुक, बिल-वाउचर सहित अन्य अभिलेखों का पूर्ण प्रभार नहीं सौंपे जाने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने पंचायत के रिकॉर्ड की जांच और दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की है।
कार्यवाही पंजी में हस्ताक्षर को लेकर आरोप
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि पंचायत बैठक की कार्यवाही पंजी में पंचों से हस्ताक्षर करवाने के बाद कथित रूप से बाद में प्रस्ताव दर्ज किए जाते थे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो पंचायत की कार्यप्रणाली और अभिलेखों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
मजदूरी भुगतान में देरी का भी आरोप
ग्रामीणों ने रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाब गहरीकरण और आवास कार्यों से संबंधित मजदूरी भुगतान में कथित देरी का मुद्दा भी उठाया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कई मजदूरों को लंबे समय तक मजदूरी नहीं मिलने की शिकायत रही।
इसके अलावा पुराने निजी तालाब को नया तालाब बताकर गहरीकरण कराने का आरोप भी आवेदन में लगाया गया है। ग्रामीणों ने ऐसे मामलों में मौके का भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामसभा के प्रस्ताव का भी दिया हवाला
शिकायतकर्ताओं ने 6 जून 2026 को हुई ग्रामसभा के प्रस्ताव का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार ग्रामसभा में गीतेन्द्र कुमार जायसवाल को सरगबुंदिया पंचायत में नहीं रखने और उनके स्थान पर किसी अन्य सचिव की पदस्थापना करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया था।
इसके बावजूद जून 2026 में जारी आदेशों के माध्यम से उनकी दोबारा सरगबुंदिया में पदस्थापना किए जाने पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है।
पहले जांच, फिर जिम्मेदारी देने की मांग
सरपंच, पंच और ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं है। उनका कहना है कि पंचायत में पारदर्शिता बनाए रखने और पुराने आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ग्रामीणों ने पुराने वित्तीय रिकॉर्ड की जांच, पंचायत अभिलेखों का परीक्षण, स्वीकृत कार्यों का भौतिक सत्यापन और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक किसी अन्य सचिव को पंचायत की जिम्मेदारी देने का आग्रह किया है।
जिला पंचायत प्रशासन के फैसले पर नजर
अब पूरे मामले में जिला पंचायत प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजर है। एक ओर सचिव की नई पदस्थापना का आदेश है, वहीं दूसरी ओर सरपंच एवं ग्रामीणों ने पुराने आरोपों और ग्रामसभा के प्रस्ताव का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज कराई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शिकायतों की जांच कराता है या नहीं और कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा पंचायत अभिलेखों से जुड़े आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद क्या सामने आती है।


