कस्टोडियल डेथ मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच शुरू; जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

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रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय
जिला संवाददाता, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
दिनांक: 19 अगस्त 2026

बिलासपुर। बिलासपुर सेंट्रल जेल से जुड़े कस्टोडियल डेथ मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने CBI को जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है।

जनवरी 2024 में हुई थी श्रवण सूर्यवंशी की मौत

मामला बिलासपुर निवासी 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की जनवरी 2024 में हुई मौत से जुड़ा है। श्रवण को 18 जनवरी 2024 को आबकारी मामले में हिरासत में लिया गया था। तीन दिन बाद 21 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

इसके बाद हुई न्यायिक जांच में मौत का कारण सिर में चोट से उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया था। इसके बावजूद पुलिस की ओर से FIR दर्ज करने में लंबा विलंब हुआ। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि FIR करीब ढाई साल बाद 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई।

DGP की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के DGP की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने FIR दर्ज करने में हुई देरी और न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए।

अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या राज्य प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने में सक्षम है। सुनवाई के दौरान DGP की कार्यप्रणाली को लेकर अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद मामले में हलचल बढ़ गई है।

न्यायिक जांच के बाद कार्रवाई में देरी पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच केवल कस्टोडियल डेथ की परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहेगी। उन राज्य अधिकारियों के आचरण की भी जांच की जाएगी, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई नहीं की।

इससे पुलिस और जेल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

CBI करेगी जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने जांच जल्द पूरी करने और अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

अब सामने आएगी जिम्मेदारी की पूरी तस्वीर

अब जांच का अहम सवाल यह है कि श्रवण सूर्यवंशी की मौत की परिस्थितियों के लिए कौन-कौन जिम्मेदार था और न्यायिक जांच में सामने आई गंभीर बातों के बावजूद FIR दर्ज करने तथा आपराधिक जांच शुरू करने में इतनी देरी क्यों हुई।

CBI को राज्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करनी है। ऐसे में पुलिस और जेल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर भी नजरें टिक गई हैं।

सरकार की भूमिका पर भी उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और CBI जांच के आदेश के बाद राज्य सरकार के स्तर पर भी जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अदालत ने DGP या DG जेल को पद से हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है, लेकिन शीर्ष अदालत की टिप्पणियों के बाद अधिकारियों की प्रशासनिक भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।

कस्टोडियल डेथ जैसे संवेदनशील मामलों में पुलिस और जेल प्रशासन की जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण होती है। अब CBI जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि श्रवण सूर्यवंशी की मौत की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जांच में हुई देरी या कथित लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।

अब निगाहें CBI की जांच पर हैं—क्या जांच केवल घटना की सच्चाई सामने लाएगी या जिम्मेदार अधिकारियों तक भी कार्रवाई की आंच पहुंचेगी?

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