सिरगिट्टी कार हादसा: चालान तक सिमटा मामला या रसूख के आगे पुलिस कार्रवाई कमजोर?

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रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय
जिला संवाददाता, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
दिनांक: 17 अगस्त 2026

तेज रफ्तार कार ने ऑटो को मारी टक्कर, फुटपाथ पर चढ़ी; हादसे के बाद विवाद और मारपीट के वीडियो वायरल, पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

बिलासपुर। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार के हादसे के बाद सामने आए वीडियो ने सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तेज रफ्तार कार ने पहले ऑटो को टक्कर मारी और इसके बाद फुटपाथ पर जा चढ़ी। हादसे के बाद मौके पर विवाद और मारपीट के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस घटना में सड़क पर मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी, वह मामला आखिरकार करीब दो हजार रुपये के चालान तक ही सीमित क्यों रहा?

वायरल वीडियो ने बढ़ाए सवाल

घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। वीडियो में हादसे के बाद क्षतिग्रस्त कार, मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ और कार सवारों के साथ हुए विवाद के दृश्य दिखाई दे रहे हैं।

एक अन्य निजी वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा है। हालांकि, इस वीडियो की निजी प्रकृति को खबर का केंद्र बनाने के बजाय मुख्य सवाल सड़क पर हुई कथित लापरवाही और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर है।

क्या पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच की?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार तेज रफ्तार में थी और चालक वाहन को नियंत्रित नहीं कर पाया। कार ने पहले ऑटो को टक्कर मारी और फिर फुटपाथ पर जा चढ़ी। गनीमत रही कि उस समय कोई राहगीर कार की चपेट में नहीं आया।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने वाहन की गति, हादसे के कारण, चालक की स्थिति, वाहन में मौजूद लोगों की भूमिका और हादसे के बाद हुए विवाद की विस्तृत जांच की?

वायरल वीडियो को जांच का हिस्सा बनाया गया या नहीं, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।

नाबालिग और नशे में होने के दावों पर भी सवाल

घटना को लेकर चालक के नाबालिग होने और नशे में वाहन चलाने जैसे दावे भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि चालक की उम्र का सत्यापन किया गया या नहीं और क्या वाहन चलाते समय उसकी स्थिति की जांच की गई थी। यदि ऐसे आरोप निराधार हैं, तो जांच के बाद उनकी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

शिकायत नहीं होने को बताया जा रहा आधार

बताया जा रहा है कि ऑटो चालक ने थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई, जिसके चलते दुर्घटना को लेकर अलग से अपराध दर्ज नहीं किया गया। यदि यह तथ्य सही है तो पुलिस कार्रवाई के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।

लेकिन सवाल यह भी है कि सड़क दुर्घटना से जुड़े उपलब्ध साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने स्वतः कोई जांच की या नहीं?

यही सवाल अब पुलिस की कार्यशैली को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या रसूख का कोई दबाव था?

बिलासपुर में यह चर्चा भी सामने आ रही है कि यदि यही घटना किसी सामान्य नागरिक से जुड़ी होती तो क्या कार्रवाई इतनी सीमित रहती? हालांकि, किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव की बात की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यदि किसी रसूखदार व्यक्ति या प्रभावशाली परिवार के दबाव में कार्रवाई कमजोर किए जाने का आरोप है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं यदि ऐसा कोई दबाव नहीं था, तो पुलिस को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि पूरे घटनाक्रम में केवल मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान को पर्याप्त कार्रवाई क्यों माना गया।

पुलिस से स्पष्ट जवाब की जरूरत

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिरगिट्टी की यह घटना केवल चालान तक सीमित होकर खत्म हो गई या फिर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी बाकी है।

पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वायरल वीडियो के आधार पर क्या जांच की गई, चालक की उम्र और वाहन चलाने की स्थिति का सत्यापन हुआ या नहीं, हादसे और विवाद के संबंध में क्या कार्रवाई की गई और क्या किसी प्रकार के दबाव की शिकायत सामने आई।

क्योंकि मामला सिर्फ एक कार के दुर्घटनाग्रस्त होने का नहीं है। सवाल यह भी है कि सड़क पर कानून और पुलिस कार्रवाई का पैमाना सभी नागरिकों के लिए समान है या नहीं।

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