वरिष्ठ साहित्यकार बंशीलाल कुर्रे के नेतृत्व में साहित्यकारों ने दी बधाई और शुभकामनाएं
रायपुर। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस के अवसर पर 14 अगस्त 2026 को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस स्थित कन्वेंशन हॉल में विविध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास को लेकर साहित्यकारों और विषय विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
प्रभात मिश्रा से साहित्यकारों ने की मुलाकात
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त डीएसपी श्री बंशीलाल कुर्रे के नेतृत्व में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोकुल बंजारे ‘चंदन’, साहित्यकार राकेश नारायण बंजारे सहित अन्य साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा से सौजन्य भेंट की।
साहित्यकारों ने श्री मिश्रा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने पर पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य के विकास के लिए उनके कार्यकाल की सफलता की कामना की।
भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर हुई चर्चा
इस दौरान श्री प्रभात मिश्रा ने साहित्यकारों से आत्मीय चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए साहित्यकारों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। मंत्री श्री केदार कश्यप तथा रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित थे।
इसके अलावा रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू, रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन, संस्कृति एवं राजभाषा के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित अनेक साहित्यकार, विद्वान एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
साहित्यकारों और आकाशवाणी से जुड़े रचनाकारों का सम्मान
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में उद्घाटन समारोह के बाद छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों तथा आकाशवाणी से जुड़े रचनाकारों का सम्मान किया गया।
द्वितीय सत्र में “बाबा तुलसीदास के साहित्य में छत्तीसगढ़” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। वहीं तृतीय सत्र में छत्तीसगढ़ी कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें आमंत्रित कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लोकजीवन, संस्कृति, सामाजिक सरोकार और माटी की महक को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
छत्तीसगढ़ी भाषा को नई गति देने पर जोर
साहित्यकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा प्रदेश की लोकसंस्कृति, परंपरा, इतिहास और अस्मिता की महत्वपूर्ण पहचान है। राजभाषा आयोग के स्थापना दिवस जैसे आयोजन साहित्यकारों को साझा मंच प्रदान करते हैं और छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


