पदोन्नति नियम 2026: 171 पदों के लिए 1000 दावेदार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के नियमों की उड़ रही धज्जियां
पदोन्नति नियम 2026 के विरोध में नियमित व्याख्याता संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी जीपीएम के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
गौरेला पेंड्रा मरवाही
छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए नए पदोन्नति नियम 2026 के खिलाफ प्रदेश भर के नियमित व्याख्याताओं में आक्रोश है। संघ का आरोप है कि विभाग की एकतरफा नीति से उच्चतर माध्यमिक शालाओं में 10-15 साल से पढ़ा रहे अनुभवी व्याख्याता अब प्राचार्य पद की दौड़ से ही बाहर हो जाएंगे। इसी कड़ी में नियमित व्याख्याता संघ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के पदाधिकारियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव एवं स्कूल शिक्षा सचिव एवं शिक्षा विभाग के राज्य स्तर के अधिकारियों के नाम एक ज्ञापन जिला शिक्षा अधिकारी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को सौंपा तथा अपना विरोध दर्ज कराया।
नियमित व्याख्याता एवं प्राचार्य संघ के अनुसार वर्ष 2019 के पदोन्नति नियमों में व्याख्याता हेतु 65 प्रतिशत एवं प्रधानपाठक माध्यमिक शिक्षा हेतु 25 प्रतिशत का पृथक कोटा निर्धारित था। लेकिन पदोन्नति नियम 2026 में इस प्रावधान को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
संघ का कहना है कि नियम बनाने वाली समिति में एक भी व्याख्याता सदस्य नहीं था। सिर्फ प्रधानपाठकों के प्रस्ताव के आधार पर नियम बना दिए गए। 01.04.2026 की स्थिति में पूरे प्रदेश में व्याख्याता के सिर्फ 171 पद रिक्त हैं, जबकि प्रधानपाठक संवर्ग में लगभग 1000 पात्र शिक्षक पदोन्नति की लाइन में हैं। नए नियम से सारे पद प्रधानपाठकों को चले जाएंगे और व्याख्याता 20-20 साल तक उसी पद पर सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद 2014 के नियम कहते हैं कि उच्चतर माध्यमिक में प्राचार्य बनने के लिए व्याख्याता का अनुभव जरूरी है। लेकिन नए नियम में बिना एक दिन पढ़ाए प्रधानपाठक को सीधी पदोन्नति का रास्ता खोल दिया गया है। संघ का आरोप है कि “जिसने कभी 11वीं-12वीं नहीं पढ़ाई, वो प्राचार्य बन जाएगा और जिसने 15 साल बच्चों को बोर्ड का परिणाम दिया, वो चपरासी से भी बदतर स्थिति में पहुंच जाएगा।”
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2003, 2013 और 2019 में हमेशा व्याख्याताओं को प्राथमिकता मिली है। व्याख्याता का पद माध्यमिक शाला प्रधानपाठक से एक श्रेणी ऊपर है। ऐसे में यह नीति पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
संघ ने सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि पदोन्नति नियम 2026 में तत्काल संशोधन कर पुनः 65:25 का कोटा लागू किया जाए। अन्यथा वे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और शिक्षामंत्री श्री गजेन्द्र यादव से मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। जरूरत पड़ी तो न्यायालय की शरण भी लेंगे।
दिनांक 7 अगस्त को नियमित व्याख्याता संघ के पदाधिकारी जिनमें प्रमुख रूप से जनभान सिंह पैकरा, दिनेश कुमार कश्यप, बृजेंद्र सिंह चौहान, मनराखन सिंह वाकरे, अरविंद पांडे, बी डी बघेल, वायु पदमा मूर्ति, संध्या चौहान, सरिता राय, रामशरण आर्मो, सत्यनारायण चौधरी, फतेहलाल चौधरी, संजीव शर्मा, अक्षय नामदेव सहित संघ के सदस्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को स्कूल शिक्षा मंत्री एवं स्कूल शिक्षा सचिव छत्तीसगढ़ शासन के नाम पर एक ज्ञापन सौंपा।


