Kargil Vijay Diwas Special : जब बड़े पर्दे पर जीवंत होती है जीत की गाथा, देशभक्ति से भर उठते हैं दर्शक

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नई दिल्ली। सीमा पर मिली जीत केवल युद्ध का अंत नहीं होती, बल्कि वह साहस, रणनीति, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन जाती है। जब ऐसी ऐतिहासिक जीत बड़े पर्दे या ओटीटी पर दिखाई जाती है, तो दर्शक सिर्फ युद्ध नहीं देखते, बल्कि उन सैनिकों के जज्बे, त्याग और तिरंगे के सम्मान को महसूस करते हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

कारगिल विजय की अमर गाथा को फिर किया गया जीवंत

वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के ऐतिहासिक अभियान को दर्शाया गया है। ट्रेलर में गूंजता संवाद—“अब या तो हम इतिहास रचेंगे, या इतिहास बन जाएंगे”—26 जुलाई 1999 की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को कारगिल युद्ध में पराजित किया था।

सीरीज में विशेष रूप से स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को दिखाया गया है। उनके किरदार को निभाने वाले अभिनेता सिद्धार्थ ने कहा कि यह भूमिका उनके लिए केवल अभिनय नहीं, बल्कि सीखने और देश के वीर सैनिकों के जीवन को समझने का अवसर थी।

ऐसी कहानियां युवाओं को करती हैं प्रेरित

सिद्धार्थ का कहना है कि सेना पर आधारित फिल्में और सीरीज युवाओं की सोच बदलती हैं। जब युवा सेना के अधिकारियों के साहस और समर्पण को देखते हैं, तो उनमें देश के प्रति सम्मान और सेवा की भावना मजबूत होती है।

युद्ध क्षेत्र की शूटिंग ने कराया वास्तविकता का अहसास

फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ में फ्लाइट कमांडर की भूमिका निभाने वाले अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने बताया कि कारगिल के उसी क्षेत्र में शूटिंग करना, जहां वास्तविक ऑपरेशन हुआ था, उनके लिए बेहद भावुक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म पहनते ही ऐसा महसूस होता है मानो सैनिकों की जिम्मेदारी और उनका जज्बा स्वयं भीतर उतर आया हो।

युद्ध आधारित फिल्मों का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं

निर्देशक जेपी दत्ता का मानना है कि युद्ध नायकों की कहानियां बार-बार पर्दे पर आनी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा के महत्व को समझ सके। उनके अनुसार, हर जीत की एक कीमत होती है और हमारे सैनिक अपने परिवारों से दूर रहकर देश की रक्षा करते हैं।

वर्दी पहनते ही जाग उठता है देशभक्ति का भाव

सैन्य-आधारित प्रोजेक्ट्स के निर्माता समर खान कहते हैं कि किसी भी कलाकार के लिए सेना की वर्दी पहनना गर्व का क्षण होता है। शूटिंग के दौरान कलाकार केवल अभिनय नहीं करते, बल्कि उस भावना को जीते हैं, जिसमें देश सर्वोपरि होता है। तिरंगे को सलाम करते समय जो गर्व महसूस होता है, वही भावना दर्शकों तक भी पहुंचती है।

देशभक्ति का संदेश देती हैं ऐसी फिल्में

कारगिल विजय और अन्य युद्धों पर आधारित फिल्में व वेब सीरीज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं। वे देश के वीर सैनिकों के साहस, बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनकर राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत करती हैं।

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