दैनिक खबर सार की खबर का महा-असर: काशीराम चौक के अवैध ‘रेत के पहाड़’ पर प्रशासन का हंटर, ट्रैक्टर और डंपर जब्त!!

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रायगढ़ @ दैनिक खबर सार :- सुशासन के दावों के बीच रायगढ़ के हृदय स्थल पर बेखौफ चल रहे अवैध रेत के काले कारोबार पर आखिरकार प्रशासन की नींद टूट ही गई। ‘दैनिक खबर सार’ द्वारा काशीराम चौक, पेट्रोल पंप और राखी सॉल्वेंट के पीछे चल रहे करोड़ों रुपये के इस खुले खेल का प्रमुखता से पर्दाफाश किए जाने के बाद, लकवाग्रस्त हो चुके प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। हमारी खबर ने उस गहरी नींद में सोए खनिज विभाग और जिला प्रशासन को झकझोर कर रख दिया, जो अब तक इस विशालकाय ‘काले पहाड़’ को देखकर भी अनदेखा कर रहा था।

खबर के प्रकाशन और प्रसारण के चंद घंटों के भीतर ही खनिज विभाग और प्रशासनिक अमले को अपनी कुर्सियां छोड़कर मौके पर दौड़ लगानी पड़ी। ‘दैनिक खबर सार’ की इस बेबाक और निर्भीक पत्रकारिता का ही यह सीधा असर है कि जिस इलाके में माफियाओं की तूती बोलती थी, वहां आज सरकारी गाड़ियों के सायरन गूंज उठे और ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

छापामार कार्रवाई से माफियाओं में मची भारी खलबली..

जैसे ही अधिकारियों का उड़नदस्ता काशीराम चौक स्थित उस स्वास्थ्य केंद्र के सामने और राखी सॉल्वेंट के पीछे पहुंचा, वहां दिन-दहाड़े चल रही रेत की लोडिंग-अनलोडिंग में लगे माफियाओं और उनके गुर्गों में भारी अफरा-तफरी मच गई। खबर के असर से दबाव में आए खनिज विभाग ने इस बार सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाने के बजाय जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाई। मौके पर हुई इस अचानक रेड के दौरान विभाग ने अवैध रेत के परिवहन में संलिप्त ट्रैक्टरों और डंपरों को रंगे हाथों पकड़ कर जब्त कर लिया है।

यह वही जगह है जहां दुष्यंत साहू और इजराइल अंसारी जैसे रसूखदार सरगनाओं ने बिना किसी रॉयल्टी, बिना पर्यावरण मंजूरी और बिना किसी डर के अपना समानांतर साम्राज्य स्थापित कर रखा था। हमारी खबर ने इस पूरे सिंडिकेट के उस सफेदपोश आका के मंसूबों पर भी पानी फेर दिया है, जिसके इशारे पर यह पूरी राजकोषीय डकैती बेखौफ अंजाम दी जा रही थी। गाड़ियों की जब्ती इस बात का प्रमाण है कि यदि मीडिया और जनता सवाल खड़े करे, तो सत्ता के नशे में चूर माफियाओं को भी बैकफुट पर आना ही पड़ता है।

अब उठ रहा है सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न: क्या राजसात होगी लाखों की रेत?

कार्रवाई और गाड़ियों की जब्ती बेशक प्रशासन का एक सकारात्मक कदम है और इससे ‘दैनिक खबर सार’ की खबर की सत्यता पर एक मजबूत मुहर भी लगी है, लेकिन असली परीक्षा तो अब शुरू हुई है। गाड़ियों को पकड़ लेना इस पूरे खेल का महज एक छोटा सा हिस्सा है। अब पूरे रायगढ़ की जनता, जागरूक नागरिक और मीडिया की पैनी नजर इस बात पर टिकी है कि उस पांच लाख रुपये से अधिक कीमत के विशालकाय अवैध रेत के डंप का आखिर क्या होगा? क्या माइनिंग ऑफिसर रमाकांत सोनी और उनका विभाग सच में इस पूरे सिंडिकेट की कमर तोड़ने का साहस दिखा पाएंगे? या फिर हमेशा की तरह कुछ ट्रैक्टरों और डंपरों का मामूली चालान काटकर, चंद हजार रुपयों का जुर्माना वसूल कर इस संगीन मामले की लीपापोती कर दी जाएगी? जनता भली-भांति जानती है कि माफियाओं के लिए चालान की यह मामूली रकम उनके करोड़ों के मुनाफे के आगे ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

प्रशासन की साख और जीरो-टॉलरेंस नीति की असली अग्निपरीक्षा..

यह मामला केवल कुछ गाड़ियों के पकड़े जाने पर खत्म नहीं होता। सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाने वाले इन माफियाओं पर ‘खान एवं खनिज अधिनियम’ और ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ के तहत गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए। बिना रॉयल्टी के डंप की गई उस लाखों की रेत को तत्काल प्रभाव से राजसात (सरकारी कब्जे में लेना) किया जाना चाहिए। यदि खनिज विभाग केवल चालान काटकर इन तस्करों को छोड़ देता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह रेड केवल मीडिया के दबाव को शांत करने के लिए रचा गया एक सुनियोजित ‘डैमेज कंट्रोल’ नाटक था।

रायगढ़ के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक महोदय के लिए यह अब एक सीधी चुनौती बन चुका है। शहर देख रहा है कि क्या प्रशासन अपने हंटर का असली इस्तेमाल करते हुए इस अवैध डंप को सील कर माफियाओं को सलाखों के पीछे भेजता है, या फिर राजनीतिक दबाव में आकर फाइल को ठंडे बस्ते के हवाले कर देता है। ‘दैनिक खबर सार’ इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है और जब तक इस काले साम्राज्य की आखिरी ईंट नहीं गिर जाती, हमारी कलम यूं ही व्यवस्था से सवाल पूछती रहेगी।

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