सेवा और संवेदना की मिसाल बनीं रेखा आहूजा, दो बुजुर्गों की आंखों में लौटाई रोशनी

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बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। मानव सेवा और संवेदना का एक प्रेरणादायक उदाहरण शहर में देखने को मिला, जहां समाजसेवी रेखा आहूजा के प्रयासों से दो बुजुर्गों के जीवन में फिर से रोशनी लौट आई। वर्षों से मोतियाबिंद से जूझ रहे दोनों प्रभुजनों का सफल ऑपरेशन कर उनकी दृष्टि वापस मिल गई, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और खुशी का संचार हुआ।


सुवानी शांति धाम सुखाश्रम के बुजुर्गों को मिला नया जीवन

यह सफल ऑपरेशन सुवानी शांति धाम सुखाश्रम के दो प्रभुजनों का किया गया, जिनकी आंखों की रोशनी लंबे समय से प्रभावित थी। ऑपरेशन के बाद दोनों बुजुर्गों ने राहत की सांस ली और सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाया।


रेखा आहूजा के प्रयासों से संभव हुआ इलाज

समाजसेवी Rekha Ahuja लंबे समय से जरूरतमंदों की सेवा में सक्रिय हैं। उन्होंने न केवल इस चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की, बल्कि पूरे अभियान का समन्वय भी किया। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सबसे बड़ी सेवा है।


समाजसेवियों ने भी निभाई अहम भूमिका

इस सेवा अभियान में सतराम जेठमलानी, राजेश खरे, सरिता सिंह, सिमरन, रूपल, भावना, रीटा, रजनी और श्याम तिवारी सहित कई सहयोगियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।


मानवता का संदेश बनी यह पहल

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि यह पहल समाज में करुणा और सेवा की भावना को मजबूत करती है। रेखा आहूजा का यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि निस्वार्थ सेवा से किसी भी व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी लाई जा सकती है।

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