नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के Narayanpur में पुलिस की एक अभिनव पहल के तहत ‘मैत्री कैफे’ का शुभारंभ किया गया। “विग्रह से विश्वास” की सोच पर आधारित यह कैफे केवल खानपान केंद्र नहीं, बल्कि पुनर्वास, रोजगार, जनसहभागिता और विश्वास निर्माण का नया मॉडल बनकर उभरा है। डीआरजी परिसर में स्थापित इस कैफे का उद्घाटन 20 जून 2026 को हुआ।
पुनर्वास और रोजगार को मिलेगा नया आयाम
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि कैफे के संचालन में आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने की योजना बनाई गई है। शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ सकें। यह कदम नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति और स्थायी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय संस्कृति और आधुनिकता का अनोखा संगम
‘मैत्री कैफे’ को बस्तर की जनजातीय कला, पारंपरिक स्थापत्य शैली और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप डिजाइन किया गया है। कैफे की दीवारों पर जनजातीय भित्ति चित्र और प्राकृतिक परिवेश इसकी खास पहचान बने हुए हैं। यह स्थान भविष्य में नागरिकों, युवाओं और प्रशासन के बीच संवाद का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
विभागीय कर्मचारियों ने खुद किया निर्माण
नारायणपुर पुलिस की इस पहल की एक और खास उपलब्धि यह रही कि कैफे का निर्माण पूरी तरह विभागीय कर्मचारियों ने अपने श्रम और रचनात्मकता से किया। कर्मचारियों के समर्पण और नवाचार की सराहना करते हुए कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित भी किया गया।
मंत्री केदार कश्यप ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Kedar Kashyap उपस्थित रहे। उनके साथ नगर पालिका परिषद नारायणपुर के अध्यक्ष Indra Prasad Baghel समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि विकास, रोजगार और विश्वास ही स्थायी शांति का आधार हैं। उन्होंने आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद कर उनके पुनर्वास से जुड़े प्रयासों की जानकारी ली और ऐसे प्रयासों को समाज के लिए बेहद जरूरी बताया।
स्थानीय स्वाद ने जीता दिल
उद्घाटन के बाद अतिथियों के स्वागत में विशेष वेलकम ड्रिंक और बस्तर के स्थानीय स्वाद से भरपूर अल्पाहार परोसा गया। खास तौर पर भाजी वाला भजिया और इटैलियन कटलेट सभी के आकर्षण का केंद्र रहे।
पुलिस-सामाजिक विश्वास का मजबूत प्रतीक
पुलिस अधीक्षक Robinson Gudiya ने कहा कि मैत्री कैफे का उद्देश्य केवल एक कैफे चलाना नहीं, बल्कि पुलिस और समाज के बीच भरोसा मजबूत करना, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और आत्मसमर्पित नक्सलियों को नई शुरुआत देना है।
नारायणपुर पुलिस की यह पहल बताती है कि सुरक्षा के साथ संवेदनशीलता, पुनर्वास और विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। ‘मैत्री कैफे’ आने वाले समय में शांति, संवाद और सामाजिक समरसता का प्रेरक मॉडल बन सकता है।


