NEET पर आंदोलन कम, रीलों का ऑडिशन ज्यादा! सांसद आवास घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं में कैमरे के सामने आने की होड़

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बिलासपुर। NEET पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस और एनएसयूआई ने केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद तोखन साहू के निवास का घेराव किया। मकसद था युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर सरकार को घेरना, लेकिन मौके पर जो नज़ारा दिखा, उसे देखकर कई लोग यही कहते नजर आए—यह आंदोलन था या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स का कोई मेगा इवेंट?

सड़क पर नारे भी लग रहे थे, पुलिस से धक्का-मुक्की भी हो रही थी, लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा सक्रिय अगर कोई था तो वह था मोबाइल कैमरा। हर तरफ फोन ऑन थे, कैमरे रिकॉर्डिंग मोड में थे और कई चेहरे ऐसे थे जिन्हें आंदोलन से ज्यादा इस बात की चिंता थी कि वीडियो में उनकी एंट्री सही एंगल से हो रही है या नहीं।

मुद्दा क्या है? “भैया ने बुलाया था…”

प्रदर्शन में शामिल कुछ कार्यकर्ताओं से जब पूछा गया कि वे किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं तो जवाब मिला—“भैया ने बुलाया था, इसलिए आ गए।”

इस जवाब ने NEET पेपर लीक से ज्यादा आंदोलन की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए। कुछ लोगों को यह तक पता नहीं था कि जिस मुद्दे पर नारे लगा रहे हैं, वह आखिर है क्या।

NEET के नाम पर प्रदर्शन, लेकिन छात्र गायब

आंदोलन का पोस्टर NEET के नाम पर था, लेकिन जिन छात्रों के भविष्य की लड़ाई लड़ने का दावा किया जा रहा था, वे कहीं दिखाई नहीं दिए। न कोचिंग संस्थानों की भागीदारी दिखी, न शिक्षक वर्ग की कोई बड़ी मौजूदगी।

ऐसा लगा जैसे NEET कहीं पीछे छूट गया और राजनीति सामने आ गई।

ड्रोन ऊपर, रील नीचे

पूरे कार्यक्रम के दौरान आसमान में ड्रोन मंडराते रहे। नीचे मोबाइल कैमरे लगातार चालू रहे। कुछ कार्यकर्ता नारे लगाने से पहले कैमरे की दिशा देख रहे थे तो कुछ पुलिस बैरिकेड के सामने पहुंचकर अपना ‘परफेक्ट शॉट’ लेने में व्यस्त दिखाई दिए।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई बार तो ऐसा लगा मानो आंदोलन नहीं, बल्कि रील शूटिंग चल रही हो।

“भैया, मेरा वीडियो शूट होने दो…”

कार्यक्रम के दौरान सुनाई दिया एक वाक्य अब चर्चा का विषय बना हुआ है—“भैया, मेरा वीडियो शूट होने दो प्लीज…”

अब यह पता नहीं चल पाया कि यह वाक्य आंदोलन को मजबूत करने के लिए कहा गया था या इंस्टाग्राम की स्टोरी मजबूत करने के लिए।

लाठीचार्ज हुआ, फिर शुरू हुआ अपलोड चार्ज

जब प्रदर्शन उग्र हुआ तो पुलिस ने वाटर कैनन और बल प्रयोग का सहारा लिया। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, कुछ को चोटें भी आईं।

लेकिन प्रदर्शन खत्म होने के बाद सबसे तेज कार्रवाई सोशल मीडिया पर देखने को मिली। कुछ ही घंटों में फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर वीडियो, रील और फोटो की बाढ़ आ गई। ऐसा लगा जैसे मैदान में संघर्ष कम और कंटेंट कलेक्शन ज्यादा हुआ हो।

जनआंदोलन या वायरल प्रोजेक्ट?

NEET पेपर लीक निश्चित रूप से गंभीर मुद्दा है। लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है। लेकिन बिलासपुर के इस प्रदर्शन ने एक अलग बहस छेड़ दी है।

क्या आज के राजनीतिक आंदोलन जनता तक संदेश पहुंचाने का माध्यम हैं, या फिर सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का मंच बनते जा रहे हैं?

क्योंकि इस प्रदर्शन के बाद शहर में चर्चा पेपर लीक की कम और रील लीक की ज्यादा हो रही है।

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