डीईओ के स्पष्ट आदेश के बावजूद 222 दिन से सूचना लंबित, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
सूरजपुर जिले के शिक्षा विभाग में सूचना के अधिकार (RTI) कानून के पालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिला शिक्षा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय द्वारा 222 दिन बीत जाने के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस मामले ने विभागीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
24 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ मामला, 10 दिन के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार आवेदक यादवेन्द्र दुबे ने 24 अक्टूबर 2025 को BEO सूरजपुर कार्यालय में पांच RTI आवेदन लगाए थे। समय सीमा में सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की। सुनवाई के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 30 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर संबंधित जनसूचना अधिकारी हरेन्द्र सिंह को 10 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
“अपील आदेश भी बेअसर”—124 दिन बाद भी सूचना नहीं, प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
अपील आदेश के अनुसार 9 फरवरी 2026 तक सूचना दी जानी थी, लेकिन 3 जून 2026 तक भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, 5 मई 2026 को दिए गए अनुस्मारक (reminder) पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह मूल आवेदन को 222 दिन और अपीलीय आदेश को 124 दिन बीत जाने के बाद भी मामला लंबित है।
“क्या कुछ छिपाया जा रहा है?”—RTI की अनदेखी पर उठे गंभीर आरोप
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि सूचना रोकने के पीछे कहीं न कहीं विभागीय लापरवाही, रिकॉर्ड प्रबंधन की खामियां या किसी अनियमितता को उजागर होने से बचाने की कोशिश तो नहीं है। हालांकि इस पर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पारदर्शिता पर संकट या व्यवस्था की विफलता? RTI की मूल भावना पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि RTI जैसे पारदर्शिता कानून का इस तरह लंबित रहना केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जवाबदेही व्यवस्था की गंभीर विफलता है। यह स्थिति शासन की पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों दोनों पर सवाल खड़े करती है।
कार्रवाई की मांग तेज, मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचने की तैयारी
आवेदक यादवेन्द्र दुबे ने संबंधित जनसूचना अधिकारी पर वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई तो मामला छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग तक ले जाया जाएगा।
“जब विभाग ही आदेश नहीं मान रहा, तो जनता को न्याय कैसे मिलेगा?”
इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब शिक्षा विभाग में ही उच्च अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी हो रही है, तो आम नागरिकों को सूचना के अधिकार के तहत पारदर्शिता और न्याय कैसे मिलेगा।




