सूखे की मार के बीच रात के अंधेरे में निजी बोर खनन: व्हाट्सएप पर वीडियो वायरल, मौके पर पहुंची मीडिया तो मची खलबली

By
Advertisement
Advertisement

कर्मचारी ने स्वीकारी नए बोर की बात, संचालक बता रहा पुरानी मरम्मत, जिम्मेदार अधिकारी फोन उठाने को तैयार नहीं

रायगढ़@दैनिक खबर सार :- भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच वार्ड क्रमांक 06 में सार्वजनिक बोरवेल पूरी तरह से सूखे पड़े हैं, लेकिन दूसरी तरफ रात के अंधेरे में निजी बोर खनन का खेल धड़ल्ले से जारी है। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस नेता संजय देवांगन ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में वीडियो और मैसेज साझा कर इसकी सूचना दी। ग्रुप में मैसेज मिलते ही मीडिया की टीम तुरंत सक्रिय हुई और बिना समय गंवाए मौके पर जा पहुंची। मौके का नजारा चौंकाने वाला था, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि मामले की तत्काल जानकारी देने के लिए जब जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाया गया, तो किसी ने भी फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।

मीडिया की टीम जैसे ही वार्ड 06 में बोर खनन वाले स्थान पर पहुंची, वहां मौजूद लोगों और काम कर रहे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर मशीन संचालित कर रहे एक कर्मचारी से जब पूछताछ की गई, तो उसने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि यहां नए बोर का खनन किया जा रहा है। हालांकि, खबर की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए जब मौके से ‘अनमोल बोरवेल’ के संचालक से उनका पक्ष जाना गया, तो उनकी दलील बयान से बिल्कुल उलट थी। संचालक ने नए खनन की बात से साफ इनकार करते हुए कहा कि यह नया नहीं बल्कि पुराना बोर है और पुरानी बोरिंग में दिक्कत आने के कारण ग्राहक ने सफाई करने को कहा था, जिसके लिए वहां पूरा सिस्टम बिठाया गया है।

संचालक की इस सफाई ने कई गंभीर और तीखे सवालों को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बोर पुराना था और महज सफाई या मरम्मत का ही कार्य होना था, तो यह काम दिन के उजाले में क्यों नहीं किया गया? रात के अंधेरे में भारी-भरकम मशीनें लगाकर काम करना इस बात का सीधा इशारा करता है कि क्या यह किसी संभावित प्रशासनिक कार्रवाई से बचने का पहले से तैयार मास्टर प्लान था। एक तरफ मौके पर मौजूद कर्मचारी नया बोर बता रहा है और दूसरी तरफ संचालक पुरानी मरम्मत की बात कह रहा है, यह विरोधाभास अपने आप में बड़े संदेह पैदा करता है। इस तरह के रात्रिकालीन कार्यों के पीछे महज़ कार्रवाई का डर है या फिर इन्हें किसी प्रकार का मजबूत राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, यह एक बड़ी जांच का विषय है।

अधिकारियों द्वारा फोन न उठाना और रात के समय ऐसे संदिग्ध कार्यों का बेखौफ चलना, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और उसकी मुस्तैदी पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। आज-कल शहर में अधिकतर अवैध गतिविधियां रात के अंधेरे में ही संचालित हो रही हैं, जिस पर लगाम लगाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। जनहित और जल संरक्षण की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, जिला प्रशासन द्वारा रात के समय विशेष मॉनिटरिंग और गश्त सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि बिना अनुमति चल रहे जल दोहन और इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

Advertisement
Share This Article