परवल 40 से 60 रुपये, कद्दू और पपीता 30 रुपये किलो तक पहुंच चुके हैं। वहीं अदरक और लहसुन के दाम 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

दाल और तेल ने भी बढ़ाई चिंता

महंगाई की मार सिर्फ सब्जियों तक सीमित नहीं है।एक सप्ताह पहले तक 120 रुपये किलो बिकने वाली अरहर दाल अब 130 रुपये किलो पहुंच गई है। सरसों तेल और रिफाइंड तेल की कीमतों में भी 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है।बाजार में सरसों तेल 190 रुपये और रिफाइंड तेल 180 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

परिवहन खर्च बढ़ने से बढ़ी महंगाई

व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन खर्च में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।राजधानी व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष कविराज स्वाईं ने कहा कि ओडिशा में अधिकांश खाद्य सामग्री पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु से आती है।

ऐसे में ढुलाई खर्च बढ़ने का असर सीधे बाजार पर पड़ रहा है।उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में स्थानीय सब्जियों की उपलब्धता कम होने पर दाम और बढ़ सकते हैं।

मनमाने तरीके से तय हो रहा एमआरपी

ओडिशा व्यवसायी महासंघ के महासचिव सुधाकर पंडा ने आरोप लगाया कि बाजार में मनमाने तरीके से एमआरपी तय किया जा रहा है। उत्पादन लागत और वास्तविक बिक्री मूल्य पर किसी की निगरानी नहीं है।

उन्होंने कहा कि थोक बाजार से खुदरा बाजार तक सामान पहुंचने में कई स्तर के व्यापारी जुड़ जाते हैं, जिससे कीमतें कई गुना बढ़ जाती हैं।उन्होंने सरकार से बाजार पर नियंत्रण बढ़ाने और महंगाई रोकने के लिए विशेष समिति गठित करने की मांग की।महासंघ ने हर दो महीने में समीक्षा बैठक करने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन अब तक सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।

आम आदमी की थाली पर संकट

लगातार बढ़ती महंगाई ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी है।रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दाल, तेल और सब्जियों के दाम बढ़ने से घर का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।लोगों का कहना है कि अगर जल्द कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं।