“आशीष गुप्ता की वसूली के बिना नहीं मिलेगा TC?” रायपुर के Venkateshwar Signature School पर छात्रा का भविष्य रोकने के आरोप, ₹2.80 लाख की मांग से मचा बवाल

By
Advertisement
Advertisement

रायपुर स्थित Venkateshwar Signature School एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की छात्रा आरवी सुल्तानियां के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन और कथित मैनेजर आशीष गुप्ता पर खुली “वसूली”, आर्थिक दबाव और छात्रा का Transfer Certificate (TC) रोकने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

परिजनों का आरोप है कि छात्रा ने केवल लगभग 15 दिन ही स्कूल और हॉस्टल में समय बिताया, लेकिन इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन करीब ₹2 लाख 80 हजार रुपये की भारी रकम मांग रहा है। परिवार का कहना है कि वे वास्तविक देय शुल्क देने को तैयार हैं, लेकिन कथित तौर पर पूरा साल का पैकेज थोपने की कोशिश की जा रही है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्कूल प्रबंधन से जुड़े आशीष गुप्ता द्वारा कथित रूप से साफ कहा गया —
“पहले पैसा जमा करो, तभी TC मिलेगा… जहां शिकायत करनी है कर लो।”

यानी अब सवाल उठ रहा है कि क्या निजी स्कूलों में शिक्षा नहीं, बल्कि “वसूली मॉडल” चल रहा है?
क्या छात्रों का भविष्य फीस की रकम से तय होगा?

“15 दिन पढ़ाई… और मांग ₹2.80 लाख?”

परिवार का कहना है कि सुरक्षा और व्यक्तिगत कारणों से बच्ची ने स्कूल छोड़ने का निर्णय लिया था। लेकिन अब TC रोक दिए जाने के कारण छात्रा का दूसरे स्कूल में एडमिशन अटक गया है।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन छात्रा के भविष्य को कथित रूप से “बंधक” बनाकर आर्थिक दबाव बना रहा है।

सरकार की सख्ती के बीच बड़ा सवाल

इसी बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए फीस, किताब और यूनिफॉर्म वसूली की जांच के लिए जिला और विकासखंड स्तर पर समितियां गठित की हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि निजी स्कूलों की आर्थिक दबंगई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लेकिन बड़ा सवाल यही है —
क्या Venkateshwar Signature School जैसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच होगी?
क्या छात्रा का TC रोकने और लाखों की मांग करने के आरोपों पर कार्रवाई होगी?
या फिर शिक्षा के नाम पर चल रही यह कथित “वसूली व्यवस्था” यूं ही जारी रहेगी?

“शिक्षा सेवा है या कारोबार?”

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार फीस विवाद के आधार पर किसी छात्र का TC रोकना शिक्षा के अधिकार की भावना के खिलाफ माना जाता है। कई न्यायालय भी स्पष्ट कर चुके हैं कि स्कूल प्रबंधन छात्रों के भविष्य को आर्थिक दबाव का हथियार नहीं बना सकते।

फिलहाल यह मामला केवल एक छात्रा का नहीं रह गया है, बल्कि निजी स्कूलों की कथित मनमानी, फीस वसूली और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक दबाव का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।

Advertisement
Share This Article