टिमरलगा में अवैध खदान में बारूद का कहर: ब्लास्टिंग से दहल उठा धरती, जीव जंतु मानव को जान का खतरा

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बारूद एक विस्फोट सामग्री हैं, अवैध सप्लाई ब्लास्टिंग पर जेल तक का प्रावधान?

प्रसिद्ध गौण खनिज ग्राम पंचायत गुड़ेली टिमरलगा के अवैध खदानो मे बिना कोई वैध अनुमति के बारूद खेल सालों से चलता आ रहा, जिसका विभाग किसी भी तरह से अवैध बारूद से अवैध खदान पर ब्लास्टिंग करने का अनुमति नहीं देता है। ग्राम पंचायत टिमरलगा उमेश के खदान से सिर्फ खनन नहीं , बल्कि पूरे धरती के छाती चीर कर लाखों टन अवैध पत्थर निकाल कर क्रेशर में बेच कर मालामाल हो गया और राजस्व को लाखों करोड़ों खुले आम चूना लगाया जा रहा है ,अवैध पत्थर खदान में बीते कुछ दिनों से नियमों को ताक पर रखकर हेवी ब्लास्टिंग ने इंसान तो दूर, बेजुबान जीव-जंतुओं पर भी कहर बरपाया। ब्लास्टिंग से निकलने हवा पर्यावरण को क्षति पहुंचाता है और पर्यावरण पॉल्यूशन को बढ़ावा देता है।

हवा नदी में जहर, राहगीर परेशान, NH रोड में पत्थर का बारिश

ब्लास्टिंग के लिए किसी भी प्रकार का सूचना नहीं दिया जाता जब माफिया चाहे उसी समय ब्लास्टिंग कर देता है, कोई वैध अनुमति के इतना बड़े कांड करना क्या सारंगढ़ पुलिस विभाग जिम्मेदार नहीं है अगर आपातकालीन में किसी व्यक्ति का जान चला जाता है तो किसका जवाबदारी होगा। ब्लास्टिंग इतना जोरो से होता है कि नेशनल हाईवे पर पत्थर की बारिश होती है जो कभी भी किसी भी बड़े हादसे को अंजाम दे सकता है। इतना बड़ा बल पूरा विभाग को जाता हैं, वही पूर्व में एसडीएम वर्षा बंसल इसी उमेश पटेल नामक व्यक्ति के अवैध खदान से 10 पोकलेन की कार्रवाई किया गया था। लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है ठीक उसी जगह पर खबर तोड़ खनन और अवैध ब्लास्टिंग का खेल जोर से चल रहा है। उमेश ने पूरा विभाग को अपना वश में कर लिया मनचाहे रकम देकर अपनी ओर आकर्षण करके रखा है जो इसके तमाम अवैध धंधों पे पर्दा डालने का काम करता है।

कार्रवाई और विभाग से सवाल, क्या उमेश अधिकारियों से बड़ा बना गया या सब मिलीभगत का खेल

वहीं कुछ सूत्रों का कहना है कि ब्लास्टिंग से परेशान है लेकिन उन पैसे वाले और बड़े आदमी से कैसे लड़े?, जब अधिकारी उनके कार्यवाही करके पक्ष में है तो कौन क्या कर पायेगा हम आम नागरिक किसी का क्या कुछ कर सकते हैं जब कोई बड़ा हादसा होता तो शासन प्रशासन किसके ऊपर कार्रवाई करेगा। कौन जिम्मेदार होगा। कभी भी किसी का जान तक भी जा सकता है क्योंकि नेशनल हाईव से खदान जुड़ी हुई है और जब ब्लास्टिंग होती है तो ब्लास्ट पत्थर रोड में गिरते हैं। ब्लास्टिंग करते समय किसी भी प्रकार का मुनादी या सूचना नहीं दिया जाता अपने दबंगई अंदाज से लगातार कई बार दिन में ब्लास्टिंग करते हैं। ऐसे में अब सवाल यहां उठता है कि ग्रामीण तो परेशान है लेकिन अधिकारी क्यों डर हुए वो स्वतंत्रता से कार्यवाही क्यों नहीं करते? क्या उमेश के अधीन है अधिकारी या फिर सब मिलीभगत का खेल है। अब इस मुद्दे को सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला के नई कलेक्टर क्या कुछ कदम उठाते हैं। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

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