रोजगार और सामाजिक अधिकारों को लेकर पूर्वांचल में निकलेगी जन संवाद यात्रा, वाराणसी बैठक में बना खाका

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वाराणसी। रोजगार एवं सामाजिक अधिकार अभियान की पूर्वांचल स्तरीय बैठक वाराणसी के रामकटोरा स्थित समता भवन में आयोजित की गई। बैठक में आगामी रोजगार एवं सामाजिक अधिकार जन संवाद यात्रा निकालने का निर्णय लिया गया, जो 9 अगस्त 2026 को इलाहाबाद से शुरू होकर 28 सितंबर 2026 को वाराणसी में समाप्त होगी।

रोजगार और सामाजिक अधिकारों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने पर हुआ मंथन

बैठक को संबोधित करते हुए आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अतिपिछड़ा, पसमांदा समाज और महिलाएं ऐसे पांच समूह हैं, जिनके रोजगार और सामाजिक अधिकारों के मुद्दे कभी प्रमुख राजनीतिक विषय नहीं बन पाए।

उन्होंने कहा कि इन समूहों की आबादी लगभग 70 प्रतिशत होने के बावजूद रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सामाजिक गरिमा जैसे मुद्दे लगातार उपेक्षित रहे हैं। ऐसे में इन वर्गों के बीच जागरूकता फैलाने और राजनीतिक संघर्ष के लिए तैयार करना जरूरी है।

पूर्वांचल के 10 जिलों से होकर गुजरेगी साइकिल यात्रा

बैठक में तय किया गया कि यात्रा का पहला चरण साइकिल यात्रा के रूप में पूर्वांचल के प्रमुख जिलों में निकाला जाएगा। यह यात्रा इलाहाबाद से शुरू होकर जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर होते हुए वाराणसी पहुंचेगी।

यात्रा के दौरान रोजगार, शिक्षा, रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू करने, लघु एवं कुटीर उद्योगों के लिए सामुदायिक ढांचा तैयार करने, सूदखोरी रोकने, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और कॉरपोरेट संपत्तियों पर कर जैसे मुद्दों पर जनसंवाद किया जाएगा।

यात्रा की तैयारियों के लिए बनाई गई समिति

बैठक में यात्रा की तैयारी और समन्वय के लिए एक समिति का गठन किया गया। समिति में डॉ. आरपी गौतम (जौनपुर), डॉ. शम्मी कुमार सिंह (वाराणसी), सविता गोंड (सोनभद्र), राजेश सचान (प्रयागराज), बाबू राम पाल (भदोही), मुनीजा (आजमगढ़), राघवेंद्र (बलिया), योगिराज पटेल (वाराणसी), जिलानी राइनी (गाजीपुर), तिलकराज बिंद (चंदौली), रहिउमुद्दीन, अजय राय (चकिया), निशांत (प्रयागराज) और इकबाल अहमद (मऊ) को शामिल किया गया।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जनमत तैयार करने पर जोर

बैठक में यह भी कहा गया कि यात्रा का उद्देश्य सिर्फ संवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन मुद्दों को आगामी विधानसभा चुनाव के प्रमुख जन मुद्दों के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

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