बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित प्रथम बौद्ध धम्म परिषद 2026 का सफल समापन, 15 दिवसीय श्रामणेर शिविर में गूंजा मानवता और शांति का संदेश

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कोसीर (सारंगढ़)। बौद्ध विहार कोसीर में 15 दिवसीय श्रामणेर शिविर और प्रथम बौद्ध धम्म परिषद का हुआ भव्य समापन
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित “प्रथम बौद्ध धम्म परिषद 2026” एवं 15 दिवसीय श्रामणेर शिविर का सफलतापूर्वक समापन बौद्ध विहार कोसीर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सम्पन्न हुआ। 26 अप्रैल से 10 मई 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे बौद्ध भंते, समाजसेवी, अनुयायी एवं श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

राष्ट्रीय स्तर के बौद्ध भंतों के सान्निध्य में आयोजित हुआ धम्म परिषद कार्यक्रम
कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक पूज्य भदंत आनंद महास्थाविर जी रहे, जो अखिल भारतीय भिक्षु महासंघ दिल्ली एवं अखिल भारतीय बुद्धगया महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वहीं विशिष्ट मार्गदर्शक के रूप में पूज्य भदंत डॉ. शीलरत्न बोधी महाथेरो जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता भदंत बुद्धघोष बोधी जी ने की, जो अखिल भारतीय भिक्षु महासंघ छत्तीसगढ़ एवं बौद्ध समाज संरक्षण संवर्धन संघ के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

खरसिया से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष किया नमन
समापन दिवस पर खरसिया से प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. भोजराम दीपक, युवा प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष तोरन कुमार लक्ष्मी, आकाश दीपक, जागेश्वर लक्ष्मी एवं प्रदेश प्रवक्ता (साहित्य प्रकोष्ठ) राकेश नारायण बंजारे विशेष रूप से उपस्थित हुए। प्रतिनिधिमंडल ने बौद्ध विहार कोसीर पहुंचकर भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया।

सात प्रांतों से पहुंचे बौद्ध भंतों और श्रामणेरों ने दिया शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश
धम्म परिषद में लगभग सात प्रांतों से पधारे बौद्ध भंते प्रतिनिधियों का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। शिविर में गिंडोला के अश्विनी भंते जी, श्रामणेर सुरेश नारंग जी, बसंत नारंग जी सहित बड़ी संख्या में भंते एवं श्रामणेर उपस्थित रहे। शिविरार्थियों ने अनुशासन और सेवाभाव के साथ क्षेत्र में शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश प्रसारित किया।

निर्माणाधीन विद्यालय के लिए सहयोग राशि देकर शिक्षा और समाज जागरण में निभाई सहभागिता
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने निर्माणाधीन विद्यालय हेतु सहयोग राशि प्रदान कर शिक्षा एवं समाज जागरण के कार्यों में सहभागिता निभाई। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने भगवान गौतम बुद्ध के दर्शन को मानवता, करुणा, समानता और विश्व शांति का सार्वभौमिक संदेश बताया।

बुद्ध के विचारों को वर्तमान समय में बताया मानवता के लिए प्रकाशपुंज
वक्ताओं ने कहा कि आज समाज वैमनस्य, हिंसा, भेदभाव, कट्टरता और मानसिक अशांति जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में भगवान बुद्ध के विचार पूरी मानवता के लिए प्रकाशपुंज का कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बुद्ध का धम्म व्यक्ति को आत्मशुद्धि, संयम, मैत्री और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाता है।

युवाओं से अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहकर मानव सेवा का मार्ग अपनाने का आह्वान
वक्ताओं ने “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के सिद्धांत को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकता को समाज उत्थान का मूल आधार बताया। साथ ही युवाओं से बुद्ध के विचारों को आत्मसात कर अंधविश्वास, भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने तथा मानव सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया।

बौद्ध समाज संरक्षण संवर्धन संघ की भूमिका को बताया ऐतिहासिक पहल
कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु बौद्ध समाज संरक्षण संवर्धन संघ (छत्तीसगढ़) की भूमिका की सराहना की गई। वक्ताओं ने इसे मानव कल्याण, सामाजिक जागृति और बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

 

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