हर शहर में सेंटर होने के बाद भी बाहर क्यों भेजे जाते हैं छात्र? NTA ने बताई ये बड़ी वजह

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NTA प्रमुख ने बताया कि JEE, NEET और CUET जैसे बड़े एग्जाम में सेंटर आवंटन केवल शहर की पसंद से नहीं, बल्कि विषय कॉम्बिनेशन, शिफ्ट और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करता है.

देश में हर साल होने वाली बड़ी प्रवेश परीक्षाओं के समय एक शिकायत बार-बार सुनाई देती है “मुझे मेरी पसंद का एग्जाम सिटी नहीं मिला.” इस बार भी JEE, NEET और CUET की परीक्षाओं के बाद हजारों छात्रों ने यही सवाल उठाया. अब इस पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने विस्तार से जवाब दिया है. उन्होंने बताया कि करोड़ों उम्मीदों के बीच परीक्षा केंद्र तय करना सिर्फ शहर चुनने का काम नहीं, बल्कि बहुत मुश्किल है.

इस साल JEE Main, NEET UG और CUET UG में मिलाकर करीब 55 लाख रजिस्ट्रेशन हुए. JEE Main में 16 लाख से ज्यादा, NEET UG में लगभग 22.7 लाख और CUET UG में 15.68 लाख छात्रों ने आवेदन किया. इनमें से कई छात्र एक से ज्यादा परीक्षा में भी बैठे. इतने बड़े स्तर पर परीक्षा कराना अपने आप में बड़ी चुनौती है.

सिर्फ शहर नहीं, कई चीजें साथ जुड़ी होती हैं

NTA प्रमुख के अनुसार, जब कोई छात्र अपनी पसंद के शहर का विकल्प भरता है, तो केवल उसी आधार पर सेंटर तय नहीं हो सकता. असल में तीन चीजें साथ काम करती हैं – शहर + चुने गए विषयों का कॉम्बिनेशन + परीक्षा की शिफ्ट.

कई बार ऐसा होता है कि जिस शहर में छात्र सेंटर चाहता है, वहां उसी विषय कॉम्बिनेशन और उसी शिफ्ट के लिए सभी सुरक्षित सेंटर पहले ही भर चुके होते हैं. ऐसे में छात्र को दूसरे शहर में सेंटर देना पड़ता है.

CUET में सबसे ज्यादा जटिलता

CUET UG में छात्रों को पांच विषय चुनने की छूट होती है. इस वजह से इस साल 12,906 अलग-अलग विषय कॉम्बिनेशन बने. अब हर कॉम्बिनेशन को अलग शिफ्ट में फिट करना, भाषा के हिसाब से पेपर तैयार करना और सुरक्षित कंप्यूटर सेंटर से जोड़ना एक बड़ा काम बन जाता है. छात्र 13 भाषाओं में परीक्षा दे सकते हैं. यानी हर प्रश्न पत्र 13 भाषाओं में तैयार करना पड़ता है. इससे योजना और भी कठिन हो जाती है.

कितनों को मिला पसंद का शहर?

NTA के अनुसार 79% छात्रों को उनकी पहली पसंद का शहर मिला है. वहीं, 96.6% छात्रों को उनकी पसंद की सूची में से कोई न कोई शहर मिला. जबकि केवल 3.4% यानी करीब 53,000 छात्रों को पसंद से बाहर शहर मिला है.  सुनने में 3.4% छोटा आंकड़ा लगता है, लेकिन असल में यह हजारों छात्रों की परेशानी है. इसी को देखते हुए NTA ने खाली सीट होने पर फ्री री-अलॉटमेंट विंडो भी खोली.

इंफ्रास्ट्रक्चर भी एक बड़ी वजह

अभिषेक सिंह ने माना कि खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों में छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के लिए पर्याप्त सुरक्षित सेंटर उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाए हैं. CUET अभी सिर्फ चार साल पुरानी परीक्षा है, लेकिन इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ी है. ऐसे में राज्य सरकारों, टेस्टिंग एजेंसियों और अन्य संस्थाओं को मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की जरूरत है.

NEET की अलग चुनौती

  • प्रश्न पत्र की सुरक्षित छपाई और ट्रांसपोर्ट
  • सेंटर पर बायोमेट्रिक जांच
  • लगभग 1.5 लाख CCTV कैमरों से निगरानी
  • दिव्यांग छात्रों के लिए स्क्राइब की व्यवस्था
  • पुलिस, राज्य सरकार, दूतावास, और कई एजेंसियों का समन्वय

सुरक्षा बनाम सुविधा की दुविधा

NTA प्रमुख ने कहा कि असली चुनौती यही है परीक्षा की सुरक्षा, गोपनीयता और ईमानदारी बनाए रखते हुए छात्रों के लिए प्रक्रिया को आसान कैसे रखा जाए. हर कदम सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन वही कदम छात्रों को सख्त भी लगते हैं.

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