मौके पर मजदूर गायब, पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति — टीवी स्क्रीन और आधार कार्ड की फोटो से भरी जा रही हाजिरी
माधौगढ़, जालौन। विकास खंड माधौगढ़ की ग्राम पंचायत सोप्ता में सरकारी योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। यहां मनरेगा कार्यों में मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति दर्ज करने के बजाय टीवी स्क्रीन पर दिखाई जा रही तस्वीरों और आधार कार्ड की फोटो का इस्तेमाल कर ऑनलाइन हाजिरी भरी जा रही है। मामले के उजागर होने के बाद पंचायत व्यवस्था और निगरानी तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चकबंद निर्माण कार्य में सामने आया फर्जी उपस्थिति दर्ज करने का मामला
जानकारी के अनुसार, शैलेन्द्र के खेत से छोटे मुन्ना के खेत तक चल रहे चकबंद निर्माण कार्य (आईडी संख्या: 31380034/ld/958486255825000343) में मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। लेकिन मौके पर जांच के दौरान कई मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद नहीं मिले, जबकि सरकारी पोर्टल पर उनकी उपस्थिति दर्ज दिखाई गई।
स्थानीय स्तर पर हुई पड़ताल में सामने आया कि ऑनलाइन हाजिरी के लिए जो तस्वीरें अपलोड की गईं, वे सीधे कार्यस्थल से नहीं ली गई थीं। आरोप है कि टीवी स्क्रीन पर प्रदर्शित फोटो को मोबाइल कैमरे से क्लिक कर पोर्टल पर अपलोड किया गया। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में मजदूरों के आधार कार्ड की तस्वीरें तक हाजिरी के रूप में इस्तेमाल की गईं।
बिट्टी देवी, किरन देवी और दिनेश कुमार के नाम पर संदिग्ध एंट्री से बढ़े सवाल
जांच के दौरान बिट्टी देवी और किरन देवी के नाम पर दर्ज हाजिरी संदिग्ध पाई गई। वहीं दिनेश कुमार के नाम पर आधार कार्ड की फोटो अपलोड होने की बात सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और पंचायत स्तर पर हो रही निगरानी प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि इस तरह की गड़बड़ियों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाएगी।
ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों की फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस गंभीर अनियमितता को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।


