छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त: डीजे और साउंड सिस्टम के बढ़ते शोर पर राज्य शासन से जवाब तलब

Advertisement
प्रदेश में लगातार बढ़ रहे ध्वनि प्रदूषण और डीजे-साउंड सिस्टम के बढ़ते शोर को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन से कड़ा जवाब मांगा है।

बिलासपुर। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे ध्वनि प्रदूषण और डीजे-साउंड सिस्टम के बढ़ते शोर को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन से कड़ा जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि पिछले एक साल से केवल कानून में संशोधन की बातें हो रही हैं, लेकिन अब तक जमीन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई है।

11 मई को रायपुर में होगी अहम बैठक
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में संशोधन को अंतिम रुप देने के लिए 11 मई को रायपुर में अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, इस बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे और नए प्रावधानों पर अंतिम चर्चा की जाएगी।

मौजूदा कानून को बताया गया कमजोर
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि वर्तमान कानून बेहद कमजोर साबित हो रहा है। उनका कहना था कि नियम तोड़ने वालों पर केवल 500 से 1000 रुपए तक का जुर्माना लगाकर कार्रवाई खत्म कर दी जाती है। न तो साउंड सिस्टम जब्त किए जाते हैं और न ही कोई सख्त दंडात्मक कदम उठाया जाता है, जिसके कारण ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है।

कोर्ट ने पूछा – जनता को राहत कब मिलेगी?
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सरकार से पूछा कि आखिर प्रभावी बदलाव कब तक लागू किए जाएंगे ताकि आम लोगों को ध्वनि प्रदूषण से वास्तविक राहत मिल सके।

सरकार ने दिए सख्त नियमों के संकेत
राज्य शासन ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित संशोधन में कड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि नए नियमों के जरिए डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम पर अधिक प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई में होगी।

Share This Article