सूरजपुर। सर्किट हाउस सूरजपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। इस मौके पर उन्होंने विपक्ष पर महिलाओं के हितों को रोकने का आरोप लगाया।
“महिलाओं के अधिकार की दिशा में ऐतिहासिक पहल”
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और लंबे समय से महिलाओं को नीति-निर्धारण में समान भागीदारी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने इस अधिनियम को “नारी शक्ति के सम्मान का महायज्ञ” बताते हुए कहा कि यह निर्णय देश की आधी आबादी को मजबूत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
विपक्ष पर साधा निशाना
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा के बावजूद विपक्ष ने इस अधिनियम का समर्थन नहीं किया। मंत्री ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के कारण महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखने की कोशिश की गई, जो निराशाजनक है।
महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर जोर
प्रेस वार्ता में कहा गया कि लंबे समय तक महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। वर्तमान सरकार इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है, ताकि महिलाओं की भागीदारी नीति निर्माण में और मजबूत हो सके।
ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख
मंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई मुद्दों पर पर्याप्त निर्णय नहीं लिए गए, लेकिन अब सरकार इसे सुधारने और महिलाओं को उच्च स्तर पर अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में मौजूद रहे कई नेता
इस अवसर पर प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी, भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रमणि पैकरा, उपाध्यक्ष रेखा राजवाड़ा सहित कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?
यह अधिनियम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में लाया गया है, जिसका उद्देश्य नीति-निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें सशक्त बनाना है।
