शिव भक्ति और आध्यात्मिकता पर केंद्रित रहा साहित्यिक समारोह
रायपुर (Raipur) में सुप्रसिद्ध चिकित्सक और कवयित्री डॉ. शीला गोयल की पुस्तक “आशुतोष तुम औघड़दानी” का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व आईएएस डॉ. सुशील त्रिवेदी (Sushil Trivedi) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि अध्यक्षता पूर्व कुलपति डॉ. अरुणा पल्टा ने की।
शिव को बताया लोककल्याण और शांति के प्रतीक
मुख्य अतिथि डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि भगवान शिव (Lord Shiva) लोककल्याण के देव हैं और आधुनिक जीवन में उनसे प्रेरणा लेकर शांति व संतुलन के साथ जीवन जीया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लेखिका ने शिव की महिमा को वर्तमान समाज की आवश्यकताओं से जोड़कर प्रस्तुत किया है।
शिव का औघड़दानी स्वरूप सबसे महत्वपूर्ण—डॉ. अरुणा पल्टा
अध्यक्ष डॉ. अरुणा पल्टा ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में शिव की आराधना जीवन को सकारात्मक दिशा देती है। उन्होंने कहा कि शिव का औघड़दानी स्वरूप करुणा और संतुलन का संदेश देता है, जो आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है।
पुस्तक को बताया आध्यात्मिक मार्गदर्शिका
विशिष्ट अतिथियों और वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक धर्म, संस्कृति और जीवन दर्शन को जोड़ती है। समीक्षक डॉ. मृणालिका ओझा ने इसे “आध्यात्मिक मार्गदर्शिका” बताया, जबकि अन्य वक्ताओं ने शिव को सहनशीलता और कल्याण का प्रतीक बताया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा कार्यक्रम
कार्यक्रम में शिव भजनों की प्रस्तुति और रुद्राक्ष स्तोत्र का पाठ भी किया गया। युवा कवियों और साहित्यकारों ने शिव पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
लेखिका ने साझा किए अनुभव
डॉ. शीला गोयल ने कहा कि शिव जैसा महादानी और लोककल्याणकारी स्वरूप संसार में दुर्लभ है। उन्होंने अपनी लेखनी को आध्यात्मिक अनुभवों और समाज से जोड़ने का प्रयास बताया।
साहित्य और संस्कृति का संगम बना आयोजन
कार्यक्रम में शहर के कई साहित्यकार, शिक्षाविद और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. सीमा निगम ने किया।


