मांड नदी एनीकट : बिना बिजली के पानी, चपले गांव बना जल प्रबंधन का मॉडल

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सूखे से समाधान तक की बदली तस्वीर
रायगढ़ जिले के ग्राम चपले में मांड नदी एनीकट अब ग्रामीण विकास और जल प्रबंधन का सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। जहां कभी गर्मी के दिनों में गांव का तालाब पूरी तरह सूख जाता था और ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब उसी स्थान पर जल उपलब्धता की नई मिसाल कायम हो गई है। यह बदलाव न सिर्फ तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बड़ा परिवर्तन लेकर आया है।

बिना बिजली के हाइड्रोपंपिंग से जल आपूर्ति
मांड नदी एनीकट में संग्रहित जल का सुनियोजित उपयोग करते हुए टरबाइन आधारित हाइड्रोपंपिंग प्रणाली विकसित की गई है। इस तकनीक के माध्यम से कुल 280 लीटर प्रति सेकंड जल में से लगभग 23 लीटर प्रति सेकंड पानी को बिना बिजली के पंप कर करीब एक किलोमीटर दूर स्थित गांव के तालाब तक पहुंचाया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया ऊर्जा की बचत के साथ-साथ संचालन लागत को भी बेहद कम कर रही है, जो इसे दीर्घकालिक और पर्यावरण के अनुकूल समाधान बनाती है।

आईआईएससी का तकनीकी सहयोग बना आधार
इस अभिनव परियोजना को मजबूत बनाने में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बंगलुरु का अहम योगदान रहा है। प्रोफेसर पुनीत सिंह के मार्गदर्शन में टरबाइन पंप का डिजाइन तैयार किया गया, जिसने इस योजना को व्यवहारिक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सहयोग दर्शाता है कि उच्च तकनीकी संस्थान और प्रशासन मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में किस तरह नवाचार को सफल बना सकते हैं।

प्रशासन की सतत मॉनिटरिंग से मिली सफलता
मांड नदी एनीकट परियोजना के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका भी सराहनीय रही। जिला कलेक्टर के नेतृत्व में लगातार मॉनिटरिंग की गई, वहीं प्रोफेसर पुनीत सिंह और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता होमेश नायक सहित अधिकारियों ने समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर गुणवत्ता सुनिश्चित की। यही वजह रही कि यह योजना तय समय में सफलतापूर्वक पूरी हो सकी।

किसानों के लिए नई उम्मीद की किरण
इस योजना का सीधा लाभ अब गांव के किसानों को मिलने लगा है। पहले जहां खेत सूखे रह जाते थे और उत्पादन प्रभावित होता था, अब सिंचाई की बेहतर व्यवस्था से किसानों में नई उम्मीद जगी है। किसान दिनेश पटेल बताते हैं कि गर्मी में पानी की समस्या अब काफी हद तक खत्म हो गई है, जिससे फसल की चिंता कम हुई है। वहीं श्याम सुंदर इसे चमत्कारिक पहल बताते हुए कहते हैं कि अब दूसरी फसल लेने की भी योजना बन रही है। किसान हीतराम राठिया के अनुसार, पानी मिलने से खेती आसान होगी और पूरे गांव को इसका लाभ मिलेगा।

निस्तारी और जनजीवन में भी बड़ा बदलाव
मांड नदी एनीकट से न केवल सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि निस्तारी के लिए भी स्थायी समाधान मिला है। गांव की महिलाओं को अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। यह बदलाव सीधे तौर पर ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बना रहा है।

सूखे तालाब में फिर लौटी हरियाली
आज चपले का वही तालाब, जो कभी गर्मी में पूरी तरह सूख जाता था, अब पानी से भरने लगा है। जल उपलब्धता ने पूरे गांव का माहौल बदल दिया है—जहां पहले सूखा और चिंता थी, वहां अब हरियाली और संतोष दिखाई दे रहा है। मांड नदी एनीकट वास्तव में एक ऐसा मॉडल बन चुका है, जिसे अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।

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