शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों का दबाव, 2 दिन में ₹19,837 करोड़ निकासी से मचा हड़कंप

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नई दिल्ली अप्रैल 2026 की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए झटके भरी रही है। जहां निवेशक नए वित्त वर्ष से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे थे, वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा कमजोर कर दी है। महज दो कारोबारी सत्रों में करीब ₹19,837 करोड़ की निकासी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।


लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव, मार्च रहा सबसे खराब

यह गिरावट अचानक नहीं आई है। मार्च 2026 में ही विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड करीब ₹1.17 लाख करोड़ बाजार से निकाल लिए थे। साल 2026 की शुरुआत से अब तक कुल निकासी ₹1.5 लाख करोड़ के पार पहुंच चुकी है। फरवरी में थोड़ी राहत के बाद अप्रैल में फिर से बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।


विदेशी निवेशकों की निकासी के पीछे 3 बड़े कारण

1. पश्चिम एशिया में तनाव
Middle East में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को जोखिम से दूर कर दिया है। ऐसे हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं।

2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर नकारात्मक असर डालता है।

3. कमजोर होता रुपया
डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 4% की गिरावट आई है। इससे विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर नुकसान का खतरा बढ़ता है, जिसके चलते वे पैसा निकालना शुरू कर देते हैं।


अमेरिकी बॉन्ड बाजार बना बड़ा आकर्षण

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, United States में बढ़ती बॉन्ड यील्ड भी एक अहम वजह है। जब निवेशकों को सुरक्षित बाजार में बेहतर रिटर्न मिलता है, तो वे इक्विटी बाजार से दूरी बना लेते हैं।


क्या निवेश का सही मौका है?

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बिकवाली के कारण कई सेक्टर में शेयरों का वैल्यूएशन अब आकर्षक स्तर पर आ गया है। हालांकि, विदेशी निवेश की वापसी तभी संभव है जब वैश्विक तनाव कम हो और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आए।



अप्रैल 2026 की शुरुआत में शेयर बाजार पर भारी दबाव देखने को मिला है। विदेशी निवेशकों ने 2 दिन में ₹19,837 करोड़ निकाले, जबकि साल की शुरुआत से कुल निकासी ₹1.5 लाख करोड़ पार कर चुकी है। Middle East तनाव, महंगा तेल और कमजोर रुपये से बाजार प्रभावित।

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