RTE Admission Crisis: छत्तीसगढ़ में 54,824 बच्चों पर संकट, प्राइवेट स्कूलों का एडमिशन से इनकार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश प्रक्रिया पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस वर्ष आरटीई एडमिशन में सहयोग नहीं करने का ऐलान किया है, जिससे प्रदेश के 54 हजार 824 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।


फीस प्रतिपूर्ति नहीं बढ़ने पर स्कूलों का सख्त फैसला

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2011 से आरटीई के तहत दी जाने वाली फीस प्रतिपूर्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बढ़ती महंगाई और खर्च के कारण निजी स्कूल आर्थिक दबाव में हैं, जिससे मजबूर होकर यह निर्णय लेना पड़ा।


6000 से ज्यादा निजी स्कूलों पर असर

इस फैसले का असर प्रदेश के 6000 से अधिक निजी स्कूलों पर पड़ेगा। ये स्कूल अब आरटीई के तहत लॉटरी या ऑनलाइन चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं देंगे, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को बड़ा झटका लगेगा।


हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी नहीं हुआ समाधान

एसोसिएशन के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर 2025 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जहां से सरकार को 6 महीने में निर्णय लेने के निर्देश मिले थे। लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, जिससे स्कूल प्रबंधन में नाराजगी बढ़ती गई।


असहयोग आंदोलन पहले से जारी

निजी स्कूलों ने 1 मार्च से ही शिक्षा विभाग के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया था। स्कूल प्रबंधन अब विभाग के नोटिस और पत्रों का जवाब भी नहीं दे रहा है।


कितनी मिलती है फीस प्रतिपूर्ति?

  • कक्षा 1 से 5: ₹7000 प्रति छात्र
  • कक्षा 6 से 8: ₹11,400 प्रति छात्र
  • कक्षा 9 से 12: ₹15,000 प्रति छात्र

स्कूलों का कहना है कि इतनी कम राशि में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो गया है।


सरकार से क्या हैं प्रमुख मांगें

  • फीस प्रतिपूर्ति राशि का पुनर्निर्धारण
  • अन्य राज्यों की तर्ज पर व्यावहारिक दर तय करना
  • लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय

क्या होगा असर?

इस फैसले का सीधा असर उन गरीब और वंचित बच्चों पर पड़ेगा, जो आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ाई का सपना देखते हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो हजारों बच्चों का दाखिला रुक सकता है।

छत्तीसगढ़ में आरटीई एडमिशन को लेकर बना यह विवाद शिक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब सबकी नजर सरकार और स्कूल प्रबंधन के बीच होने वाले अगले फैसले पर टिकी है, जो हजारों बच्चों के भविष्य को तय करेगा।

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