बीजापुर: बस्तर में बड़े नक्सली लीडर पापाराव ने पुनर्वास कर दिया है. ये नक्सलवाद खात्मे की 31 मार्च की डेडलाइन से हफ्ते भर पहले मिली बड़ी कामयाबी है. पापाराव ने अपने साथियों के साथ बीजापुर जिले के कुटरु थाना में अपने हथियार जमा किए.
पापाराव ने डाले साथियों के साथ हथियार
पापाराव समेत 18 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं. सभी नक्सलियों ने कुटरु थाना में अपने हथियार जमा किए. इसके बाद उनको बस से जगदलपुर रवाना किया गया है. पापाराव ने बताया कि लगातार नक्सल संगठन के ऊपर दबाव, जंगलों में कठिन जीवन और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.
डीकेएसजेडसी लेवल का अब कोई नक्सल लीडर छत्तीसगढ़ में नहीं है. एरिया कमेटी मेंबर भी नहीं हैं. छत्तीसगढ़ 31 मार्च तक सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त होगा– विजय शर्मा, डिप्टी सीएम, छत्तीसगढ़
बस्तर में करीब 30 से 40 की संख्या में माओवादी पूरे बस्तर इलाके में मौजूद हैं, जिनसेसे लगातार मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की जा रही है: सुंदरराज पी, बस्तर आईजी
भारत के संविधान में मेरी आस्था है. हथियार छोड़ रहे हैं. अब हम गरीबी और आदिवासियों की लड़ाई संविधान के हिसाब से लड़ेंगे. जल,जंगल और जमीन की लड़ाई संविधान के दायरे में रहकर करेंगे. फोर्स की वजह से जंगल में भी हम आराम से नहीं रह पा रहे थे.चुनाव के जरिए लोगों को अपनी बात रखी चाहिए. हम जनता के लिए लड़ाई लड़ेंगे. संविधान से जो हमें अधिकार मिला है उसका पालन कर लोगों की आवाज उठाएंगे: पापाराव, DKSZC सदस्य तथा साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो के इंचार्ज
कौन है पापाराव
पापाराव ऊर्फ सुनम चंदरैय्या ऊर्फ मंगू दादा ऊर्फ चंद्रन्ना (56) छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी है. वह DKSZCM यानि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर है. वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य भी है. पापाराव नक्सल संगठन में एक बड़ा नाम है. साल 2010 में हुए ताड़मेटला कांड का मास्टरमाइंड पापाराव को बताया जाता है. पापाराव की नक्सल संगठन की रणनीतिक गतिविधियों और कैडर संचालन में अहम भूमिका रही है.


