कुछ दुकानों के सामने का हिस्सा तोड़ा, कुछ VIP दुकानें छोड़ दीं – निगम की ‘सफाई’ या नेता संरक्षण? वार्ड पार्षद का चुप्पी का राज क्या?
रायगढ़ :- जुटमिल क्षेत्र की नाली सफाई को लेकर अब स्थानीय दुकानदारों में गुस्सा भड़क उठा है। निगम ने पहले नोटिस जारी कर सफाई का दावा किया, लेकिन ग्राउंड पर तस्वीर कुछ और ही है। कुछ दुकानों के सामने का हिस्सा बेरहमी से तोड़ दिया गया, वहीं कुछ दुकानें पूरी तरह सुरक्षित छोड़ दी गईं। सवाल उठ रहा है – आखिर यह VIP ट्रीटमेंट किसका? क्या निगम की सफाई अभियान नेता संरक्षण का नया रूप बन गया है?

कांग्रेस सरकार के समय इस नाली की सफाई को लेकर दर्जनों शिकायतें की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब भाजपा सरकार आते ही सफाई शुरू हुई तो दुकानदारों ने राहत की सांस ली। लेकिन राहत की जगह अब सवाल खड़े हो गए हैं। निगम के मिनी बुलडोजर ने चयनात्मक हमला किया। जो दुकानें, अस्पताल ‘संबंधित’ थीं, उन्हें छोड़ दिया गया। क्या यही है निगम की ‘भाईचारा वाली’ सफाई?

स्थानीय वार्ड पार्षद पर सबसे बड़ा सवाल है। जब शराब भट्टी के खिलाफ उन्होंने खुलकर मोर्चा लिया, तब तो पूरा वार्ड उनके साथ था। लेकिन आज नाली सफाई में हो रहे इस खुल्लमखुल्ला भेदभाव पर उनकी चुप्पी क्यों? क्या उन्हें वार्डवासियों की बात सिर्फ वोट के समय सुननी होती है? चुनाव जीतने के बाद तो VIP और आम के बीच फर्क साफ दिख रहा है। क्या पार्षद महोदया किसी के दबाव में हैं या खुद ही इस भेदभाव की सहयोगी बन गई हैं? जब तक सफाई अभियान चलेगा, तब तक पार्षद का यह मौन खतरनाक संदेश दे रहा है – “मेरे वार्ड में न्याय सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए!”
स्थानीय लोगों का कहना है – “हम सफाई चाहते हैं, लेकिन भेदभाव नहीं। निगम अगर सच में जनसेवक है तो सभी के साथ बराबर व्यवहार करे।” अब देखना यह है कि वार्ड पार्षद अपना मौन तोड़ती हैं या फिर VIP संरक्षण जारी रखने देती हैं। निगम भी जवाब दे – क्या यह सफाई है या सिर्फ दिखावा?
निगम और वार्ड पार्षद पर अब जनता की नजर टिकी हुई है। अगर भेदभाव जारी रहा तो यह मुद्दा जल्द ही बड़ा आंदोलन बन सकता है। रायगढ़ निगम और पार्षद को तुरंत स्पष्ट जवाब देना होगा – भाईचारा सबके लिए या सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए?


