बस्तर में बड़ी सफलता: 108 नक्सली आत्मसमर्पण कर लौटे समाज की मुख्यधारा में

By
Advertisement
Advertisement

नक्सलियों ने हथियार छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया

छत्तीसगढ़ के Chhattisgarh के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में आज बड़ी सफलता हासिल हुई। बस्तर क्षेत्र में 108 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण किया, अपने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया।

नक्सलियों का आत्मसमर्पण: विकास और पुनर्वास नीति का असर

जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली लंबे समय से विभिन्न माओवादी संगठनों से जुड़े हुए थे और बस्तर के कई इलाकों में सक्रिय रहे। सरकार की पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और क्षेत्रीय विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि वे सामान्य जीवन में पूरी तरह शामिल हो सकें।

अभियान और ग्रामीण सहयोग ने कमजोर किया नक्सलियों का मनोबल

अधिकारियों के अनुसार, बस्तर में लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान, ग्रामीणों का सहयोग और राज्य की विकासपरक योजनाओं ने नक्सलियों का मनोबल कमजोर किया है, जिससे बड़ी संख्या में वे आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने कहा कि अब वे हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की राह पर चलना चाहते हैं और लोकतंत्र में विश्वास रखते हुए समाज के साथ मिलकर जीवन बिताना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने दी सफलता की पुष्टि

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि अब बस्तर में बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की जीत हो रही है। उन्होंने कहा कि जगदलपुर में ₹3.29 करोड़ के इनामी 108 सशस्त्र माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय शांति, सुशासन और विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से कहा कि आज बस्तर में 108 नक्सलियों ने हथियार रखकर लोकतंत्र में विश्वास जताया। उन्होंने कहा, “हम आज भी एक गोली नहीं चलाना चाहते। आपका स्वागत है।”

Advertisement
Share This Article