रामगढ़ की ऐतिहासिक गुफाओं से लेकर ग्रामीण पर्यटन तक पर हुई चर्चा, युवाओं को प्रकृति संरक्षण के लिए किया गया प्रेरित
उदयपुर/ सरगुजा शासकीय राजकुमार धीरज सिंह महाविद्यालय, उदयपुर (सरगुजा) में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान तथा छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से ‘इको टूरिज्म’ विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 7 मार्च से 11 मार्च 2026 तक किया जा रहा है। कार्यशाला के प्रथम दिवस उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य वंदना पाण्डेय ने की।

कार्यक्रम में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष राधेश्याम सिंह ठाकुर तथा नवीन महाविद्यालय लखनपुर के प्राचार्य डॉ. एस. के. श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं साहित्यकार एवं लेखक शिरीष मिश्रा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना से की गई। इसके पश्चात सरस्वती वंदना तथा छत्तीसगढ़ राज्य गीत का सामूहिक गायन किया गया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. वंदना पांडे ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इको टूरिज्म के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि राधेश्याम सिंह ठाकुर ने पर्यटन की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से सरगुजा क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी साझा की। वहीं डॉ. एस. के. श्रीवास्तव ने वैश्विक पर्यटन परिदृश्य के साथ भारत और छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने युवाओं से प्रकृति संरक्षण और पर्यटन स्थलों के विकास में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में मुख्य वक्ता शिरीष मिश्रा ने रामगढ़ में स्थित ऐतिहासिक सीता बेंगरा और जोगीमारा गुफा से संबंधित अपने शोध का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने इन प्राचीन धरोहरों के ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक पक्षों का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही गुफाओं में अंकित लिपियों को आकृति लिपि, शंख लिपि तथा भाव-चित्रात्मक लिपि के माध्यम से समझाया।
उन्होंने बताया कि पर्यटन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संरक्षण का महत्वपूर्ण साधन भी है। साथ ही होमस्टे की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समन्वय मुकेश कुमार रजक, सहायक प्राध्यापक (भूगोल) द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन उमेश ओहदार, सहायक अध्यापक (प्राणिशास्त्र) ने किया। अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया और अध्यक्ष की अनुमति से कार्यक्रम का समापन किया गया।