नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का समापन, भारत को 250 अरब डॉलर से अधिक निवेश का भरोसा

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नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट अपने अंतिम दिन पर पहुंच चुका है, लेकिन इसके परिणाम पहले ही भारत के लिए बड़ी उपलब्धि के संकेत दे चुके हैं। अरबों डॉलर के निवेश, वैश्विक टेक दिग्गजों की भागीदारी और दर्जनों देशों के समर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ में नेतृत्व की ओर अग्रसर है।

250 अरब डॉलर से अधिक निवेश कमिटमेंट

समिट की सबसे बड़ी उपलब्धि एआई बुनियादी ढांचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश वादे को माना जा रहा है। यह राशि डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च क्षमता वाले एआई कंप्यूटिंग नेटवर्क के विकास में खर्च होगी। इससे देश का डिजिटल ढांचा मजबूत होगा और टेक सेक्टर को नई गति मिलेगी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और जियो ने अगले सात वर्षों में लगभग 109.8 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है। कंपनी देशभर में अत्याधुनिक डेटा सेंटर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और एआई सेवाओं के विस्तार पर फोकस करेगी।

वहीं अडानी समूह ने 2035 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 अरब डॉलर निवेश की योजना पेश की है। यह निवेश मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने पर केंद्रित होगा, जिससे संबंधित क्षेत्रों में करीब 150 अरब डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक प्रभाव उत्पन्न होने का अनुमान है।

माइक्रोसॉफ्ट और वैश्विक कंपनियों का भरोसा

माइक्रोसॉफ्ट ने इस दशक के अंत तक ग्लोबल साउथ में एआई विस्तार के लिए 50 अरब डॉलर तक निवेश की योजना जताई है। कंपनी पहले ही भारत में 17.5 अरब डॉलर के निवेश का रोडमैप घोषित कर चुकी है।

इसके अलावा योट्टा डेटा सर्विसेज 2 अरब डॉलर की लागत से एशिया के सबसे बड़े एआई कंप्यूटिंग हब में से एक विकसित कर रही है, जिसमें एनवीडिया की उन्नत चिप्स का उपयोग होगा।

गूगल का बड़ा दांव, विशाखापत्तनम में AI हब

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने समिट में कहा कि एआई हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा तकनीकी परिवर्तन है और भारत तेजी से वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है।

गूगल आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में करीब 15 अरब डॉलर के निवेश से एक फुल-स्टैक एआई हब तैयार कर रहा है। इस परियोजना में गीगावॉट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे शामिल होगा। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत को क्या मिलेगा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन निवेशों से:

  • एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी
  • लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे
  • स्टार्टअप और रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी
  • भारत वैश्विक एआई सप्लाई चेन में प्रमुख भूमिका निभा सकेगा

समिट के नतीजे संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल एआई तकनीक का बड़ा उपभोक्ता रहेगा, बल्कि नवाचार और नेतृत्व की भूमिका भी निभा सकता है।

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