जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने प्रशासन का बड़ा अभियान
रायगढ़, 20 नवंबर। कलेक्टर के निर्देश पर जिले में व्यापक bal vivaah mukt abhiyan चलाया जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी एल.आर. कच्छप ने बताया कि लक्ष्य है—31 मार्च 2029 तक पूरे जिले को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित करना।
● कार्यशाला में कानून और दंड प्रावधानों की दी गई जानकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के नियम, दंड प्रावधान और अभियान के लक्ष्यों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उपस्थित सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकने की शपथ दिलाई गई।
● जन-संपर्क गतिविधियों से बढ़ाई जा रही जागरूकता
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि jan jagrukta बढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिशन शक्ति समूह, चाइल्ड हेल्प लाइन child helpline 1098 की टीम लगातार गांवों, स्कूलों और विभागीय बैठकों में बाल विवाह रोकथाम का संदेश दे रही है।
जागरूकता बढ़ाने हेतु दीवारों पर नारा लेखन का अभियान भी चलाया जा रहा है।
● हर ग्राम पंचायत में तैनात किए गए प्रतिषेध अधिकारी
अधिनियम 2006 के अनुसार जिले के कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर और प्रत्येक ग्राम पंचायत के सचिव को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नामित किया गया है। बाल विवाह से संबंधित कोई भी सूचना इन्हें या 1098 पर दी जा सकती है। सूचना देने वाले की पहचान को पूर्ण गोपनीय रखा जाता है।
● ग्राम सभाओं से मिल रहा है समर्थन—सर्वसम्मति से पारित हो रहे प्रस्ताव
ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित ग्राम सभाओं में बाल विवाह रोकथाम प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए जा रहे हैं। पंचायतें गांव को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प भी ले रही हैं, जिससे bal vivaah mukt abhiyan को गती मिल रही है।
● कानून के अनुसार सख्त सज़ा—परिजन और पुरोहित पर भी कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि बालिकाओं की विवाह आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम आयु में विवाह कराने, सहयोग देने या आयोजन करने पर एक लाख रुपये जुर्माना और दो वर्ष तक कारावास का प्रावधान है।
नाबालिग के जबरन विवाह में शामिल पुरोहित और परिजन दोनों दोषी माने जाएंगे और कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।


