SECL Durgapur 2 Coal Mines : S.E.C.L दुर्गापुर-2 कोल माइंस : प्रभावित किसानों ने गणना की मांग उठाई, जमीन खरीद-बिक्री पर विवाद तेज

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प्रतीक मल्लिक ✍️

10 साल बाद भी नहीं हुई पूर्ण गणना

SECL Durgapur 2 Coal Mines के अधिग्रहण को लगभग दस वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रभावित किसानों की भूमि गणना पूरी नहीं हो सकी है। फरवरी 2014 में धारा 4 की अधिसूचना जारी की गई थी, और फरवरी 2016 में भूमि का स्वामित्व राज्य शासन से साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बावजूद किसानों का मुआवजा और गणना कार्य अधूरा है।


अप्रभावित किसानों ने भी उठाई आपत्ति

धरमजयगढ़ के भू-अर्जन अधिकारी द्वारा टीम गठित कर सर्वे के आदेश दिए जाने के बाद न केवल प्रभावित बल्कि अप्रभावित किसानों ने भी तहसीलदार, राज्यपाल और वित्त मंत्री तक आवेदन भेजा है। किसानों का आरोप है कि गणना में भेदभाव किया जा रहा है और कुछ व्यक्तियों को अनुचित लाभ मिल रहा है।


2016 के बाद भी जारी रही जमीन की खरीदी-बिक्री

SECL Durgapur 2 Coal Mines के अधिग्रहण के बाद 2016 से खरीदी-बिक्री और डायवर्सन पर प्रतिबंध लागू है। बावजूद इसके 2023 में अधिग्रहित भूमि के कई सौदे हुए। कोल कंपनी ने 2022 में राजस्व अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश भेजे थे कि प्रभावित क्षेत्र में कोई खरीदी-बिक्री या डायवर्सन न हो, लेकिन आदेशों की अनदेखी की गई।


अंतिम चरण में फिर बढ़ा विवाद

अब जब कोल खदान संचालन अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, कुछ व्यक्तियों ने पुराने सौदों के आधार पर एक से अधिक हक-पट्टे तैयार कर लिए हैं। प्रभावित क्षेत्र के बाहर के लोग मुआवजा तय न होने का हवाला देकर पुनः गणना की मांग कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया में देरी हो रही है।


गणना रोकने की कोशिश — किसानों ने जताई आपत्ति

स्थानीय किसानों का कहना है कि गणना रोकने की मांग करने वाले कुछ लोग स्थिति का फायदा उठाकर “औने-पौने” दामों पर जमीन खरीदना चाहते हैं। उनका मानना है कि मुआवजा भारतीय स्टांप अधिनियम और राज्य शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही तय होगा, न कि किसी निजी सौदे से।


प्रशासन से पारदर्शिता की मांग

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि SECL Durgapur 2 Coal Mines के अधिग्रहण क्षेत्र की गणना और मुआवजा प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूर्ण किया जाए, ताकि वास्तविक प्रभावितों को न्याय मिल सके और अनधिकृत खरीद-बिक्री करने वालों पर रोक लगाई जा सके।

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