सुंदरगढ़/नुआगांव। राजस्व ग्राम कुलागोजो (पंचायत–उरमई) में मनरेगा मजदूरों को काम न मिलने का मामला गंभीर होता जा रहा है। गांव में लगभग 300 जॉब कार्ड धारक मजदूर पंजीकृत हैं, जिन्हें योजना के तहत एक वर्ष में 100 दिन रोजगार मिलना अनिवार्य है, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश ग्रामीणों को 10 से 30 दिन से अधिक काम नहीं मिला। वहीं कई मजदूर ऐसे भी हैं जिन्हें पूरे वर्ष एक भी दिन का कार्य उपलब्ध नहीं कराया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बेरोजगारी के इस दौर में मनरेगा उनकी आजीविका का मुख्य सहारा है, लेकिन काम न मिलने से मजदूर परिवार आर्थिक संकट और भरण-पोषण की समस्या से जूझ रहे हैं।
सरपंच का बयान
जब इस संबंध में पंचायत स्तर पर बात की गई तो सरपंच ने कहा —
“गांव में करीब 20 पुराने कार्यों की फाइलें बंद नहीं हुई हैं। जब तक ये प्रकरण पूर्ण नहीं होते, तब तक नए कार्य स्वीकृत नहीं किए जा सकते।”
लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि पुरानी फाइलों की प्रक्रिया में देरी का खामियाजा मजदूर क्यों भुगतें?
मजदूरों का कहना है कि यदि फाइल बंद नहीं है, तो यह प्रशासन एवं पंचायत की कार्यप्रणाली की कमी है, न कि मजदूरों की गलती।
ग्रामीणों की मांग
- मनरेगा में तुरंत नए कार्य स्वीकृत कर मजदूरों को काम दिया जाए
- पुरानी फाइलों की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए
- वर्ष में 100 दिन काम सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी तय की जाए
- बिना काम के मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता देने पर विचार किया जाए
स्थिति गंभीर, कार्रवाई अपेक्षित
गांव के मजदूरों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे जनपद और जिला स्तर पर शिकायत और प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।


