अदानी के गुंडों का तांडव, पत्रकारों पर जानलेवा हमला: पुलिस की खामोशी पर उबल रहा सवालों का समंदर

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रायगढ़ :- रायगढ़ में अदानी कंपनी की गुंडागर्दी ने सारी हदें लांघ दीं! 6 अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर में पत्रकारों पर हमला, गाली-गलौज और खुलेआम जान से मारने की धमकी का काला कांड सामने आया है। अदानी के कथित गुर्गों और अधिकारियों ने न सिर्फ पत्रकारों को डराने-धमकाने की जुर्रत की, बल्कि फर्जी ग्रामसभा और विस्थापन जैसे संगीन सवालों से बचने के लिए गुंडई का जोरदार तमाशा रचा। इस शर्मनाक हरकत ने अदानी की काली करतूतों को नंगा कर दिया। प्रेस क्लब ने 8 अगस्त को जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर फौरन कार्रवाई की फरियाद की, लेकिन पुलिस की रहस्यमयी खामोशी ने जनता के गुस्से को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया। आखिर पुलिस क्यों बन रही है अंधी-बहरा?



मामला तब भड़का जब 6 अगस्त को कुछ ग्रामीण, जिनके हाथों में महाजेनको कंपनी के पोस्टर थे, गारे पेलमा में खदान शुरू करने के समर्थन में कलेक्टर से मिलने पहुंचे। कलेक्टर से मुलाकात के बाद जब पत्रकारों ने उनसे विस्थापन और फर्जी ग्रामसभा के गंभीर सवाल दागे, तो ग्रामीणों की बोलती बंद हो गई। तभी अदानी कंपनी के कथित कर्मचारी, जो खुद को कंपनी का मठाधीश बता रहे थे, पत्रकारों पर भूखे भेड़ियों की तरह टूट पड़े। इन गुंडों ने पत्रकारों को ‘गुंडा’ कहकर जलील किया और जान से मारने की धमकी दे डाली। इस घिनौने कांड की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जो अदानी की दबंगई की सारी परतें उधेड़ रही है।



मौके पर मौजूद पुलिस ने जैसे-तैसे हालात को संभाला, लेकिन जैसे ही पत्रकार लौटने लगे, अदानी के गुंडों ने फिर से धमकियों का तूफान खड़ा कर दिया। गुस्साए पत्रकारों ने चक्रधर नगर थाने में लिखित शिकायत ठोकी, लेकिन हैरत की बात है कि शिकायत के बाद भी अदानी के इन गुंडों पर पुलिस ने एक डंडा तक नहीं चलाया। उल्टा, ये गुंडे पत्रकारों को फोन कर राजीनामा करने और धमकाने में जुट गए। सवालों का समंदर उबल रहा है—क्या अदानी कंपनी इतनी ताकतवर हो गई है कि वह पत्रकारों को खुलेआम धमका सकती है और पुलिस खामोश तमाशबीन बनी रहे?



जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। स्थानीय लोगों ने पत्रकारों का समर्थन करने के लिए आगे आते हुए जोरदार आवाज उठाई है। एक स्थानीय निवासी ने गुस्से में कहा, “क्या सरकार है हमारी? एक तरफ कंपनी के गुंडों को समर्थन दिया जा रहा है, ग्रामीण बता कर झूठे लोगों की बात मान ली जा रही है और जो हम स्थानीय गांव के हैं, हमें कुचला जा रहा है। फर्जी ग्राम सभा का नाम लेकर ढिंढोरा पीटा जा रहा है। आज लगता है कानून अंधा है!” ये शब्द न सिर्फ सरकार की पोल खोल रहे हैं, बल्कि अदानी की साजिशों पर भी सीधा प्रहार कर रहे हैं। स्थानीय लोग अब खुलकर कह रहे हैं कि कंपनी फर्जी लोगों को आगे कर ग्रामीणों को दबा रही है, जबकि असली पीड़ितों की आवाज दबाई जा रही है।

प्रेस क्लब ने पुलिस अधीक्षक से साफ-साफ मांग की है कि ग्रामीणों के भेष में आए अदानी के एजेंटों और जिम्मेदार अधिकारियों की फौरन शिनाख्त कर सलाखों के पीछे डाला जाए। एक वरिष्ठ पत्रकार ने तल्ख लहजे में कहा, “अदानी की गुंडई अब हद से गुजर चुकी है। ये लोग ग्रामीणों को ढाल बनाकर पत्रकारों को कुचलने की साजिश रच रहे हैं। अगर पुलिस अब भी चुप रही, तो ये लोकतंत्र पर काला साया होगा।”

रायगढ़ में पत्रकारों पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और हर बार अदानी कंपनी का नाम किसी न किसी रूप में उछल रहा है। स्थानीय लोग खुलकर पूछ रहे हैं—आखिर पुलिस क्यों कान में रुई ठूंसे बैठी है? क्या अदानी का रसूख इतना भारी है कि पुलिस कार्रवाई करने से डर रही है? जनता के बीच ये चर्चा जोर पकड़ रही है कि अगर जल्द ही आरोपियों को पकड़ा नहीं गया, तो ये मामला सड़कों पर आग बनकर भड़केगा।

अदानी कंपनी की इस बेलगाम दबंगई ने न सिर्फ पत्रकारों की जान को खतरे में डाला, बल्कि ये भी साफ कर दिया कि कैसे कॉरपोरेट ताकतें स्थानीय समुदायों और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को रौंदने की साजिश रच रही हैं। जनता की मांग है कि अदानी के इन गुंडों को कठघरे में लाया जाए और पुलिस अपनी खामोशी तोड़े। क्या अदानी के गुर्गे कानून को ठेंगा दिखाते रहेंगे, या पत्रकारों और स्थानीय लोगों को इंसाफ मिलेगा? ये सवाल अब रायगढ़ की हर गली-चौराहे पर गूंज रहा है।

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