जगदलपुर: सीनियर माओवादी कमांडर पापाराव ने आज जगदलपुर में औपचारिक रूप से अपने 17 अन्य साथियों के साथ पुनर्वास किया. सभी माओवादियों ने पुलिस को एके-47 राइफलें और अन्य हथियार भी सौंप दिए हैं. माओवादियों से करीब 10 लाख कैश भी मिला है. जगदलपुर जिला मुख्यालय में समाज की मुख्यधारा से जुड़ने पहुंचे नक्सली कमांडर और उनके 17 साथियों का स्वागत समाज के लोगों ने फूल मालाओं से किया. नक्सली कमांडर पापाराव और उनके साथियों को संविधान की पुस्तक भी इस मौके पर भेंट की गई.

गृहमंत्री विजय शर्मा के सामने औपचारिक सरेंडर
कल जब नक्सली कमांडर पापाराव अपने साथियों के साथ बीजापुर के कुटरू पहुंचा तो उसने कहा था कि अब वो समाज की मुख्यधारा से जुड़कर काम करना चाहता है. पापाराव ने कहा कि संविधान के दायरे में रहकर वो संवैधानिक तरीके से जल, जंगल और जमीन के लिए आदिवासियों के साथ काम करेगा.
बस्तर में नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा हो चुका है. हिंसा के रास्ते पर चलकर कुछ भी हासिल नहीं होता है. समाज की मुख्यधारा में जुड़कर आप समाज भी बदलाव लाना चाहते हैं, तो उस बदलाव को लाएं: विजय शर्मा, गृहमंत्री

सीनियर माओवादी कमांडर पापाराव का पुनर्वास
31 मार्च तक हम तय समय सीमा के भीतर नक्सलवाद को खत्म करने में सफल होंगे. बस्तर में अब गिने चुने नक्सली बच गए हैं. मेरी अपील है कि वो हथियार डाल दें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ जाएं: सुंदरराज पी, बस्तर आईजी
पापाराव और उनके साथियों से मिले हथियार
8 – AK-47
2 – INSAS राइफल
4 – 303 राइफल
2 – सिंगल शॉट
1 – BGL लॉन्चर
बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस
जानिए कौन है पापाराव
पापाराव ऊर्फ सुनम चंदरैय्या ऊर्फ मंगू दादा ऊर्फ चंद्रन्ना, उम्र 56, छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी है. नक्सली कमांडर पापाराव DKSZCM यानी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर है. वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य भी है. पापाराव नक्सल संगठन में एक बड़ा नाम है. साल 2010 में हुए ताड़मेटला कांड का मास्टरमाइंड पापाराव को बताया जाता है. पापाराव की नक्सल संगठन की रणनीतिक गतिविधियों और कैडर संचालन में अहम भूमिका रही है.
क्या है पूना मारगेम योजना
पूना मारगेम छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग में नक्सलवाद को खत्म करने और शांति स्थापित करने के लिए शुरू की गई एक प्रमुख पुनर्वास नीति है. गोंडी भाषा में इसका अर्थ “नई सुबह” या “अच्छी दिशा” है. इस अभियान के तहत हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को रोजगार, शिक्षा, और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहायता प्रदान की जाती है.
