गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 90 लाख का ‘शिक्षा घोटाला’? बंद योजना की राशि पर डाका, जनपद सीईओ विनय कुमार सागर पर सीधे आरोप

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मरवाही जनपद पंचायत में हड़कंप, शिक्षा मद की रकम पर बड़ा खेल उजागर
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही जनपद पंचायत में एक बड़ा वित्तीय विस्फोट सामने आया है। बंद हो चुकी सर्व शिक्षा अभियान योजना की राशि में कथित तौर पर भारी गड़बड़ी हुई है, और इस पूरे मामले में सीधे निशाने पर हैं जनपद पंचायत सीईओ विनय कुमार सागर। सूत्रों के मुताबिक करीब 90 लाख रुपये की शासकीय राशि संदिग्ध तरीके से निकाली गई है, जिसने पूरे प्रशासनिक ढांचे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

शासन के आदेश की अनदेखी, फंड जमा करने के बजाय किया गया ‘डायवर्जन’
जानकारी के अनुसार, सर्व शिक्षा अभियान को समग्र शिक्षा अभियान में विलय किए जाने के बाद स्पष्ट निर्देश थे कि इस मद में शेष राशि को राज्य स्तर के SNA खाते में जमा किया जाए। इसके लिए लिखित आदेश भी जारी किए गए थे।
इसके बावजूद मरवाही जनपद पंचायत में इन निर्देशों को नजरअंदाज कर फंड को निर्धारित खाते में जमा करने के बजाय अन्य खातों में ट्रांसफर किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

निजी खातों में पहुंची सरकारी रकम? लेन-देन पर गहराया शक
सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, वह बेहद चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि शासकीय राशि को अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। कहीं पेट्रोल खर्च के नाम पर भुगतान हुआ तो कहीं ट्रैवल से जुड़े बिलों के जरिए रकम निकाली गई।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जनपद से जुड़े कर्मचारियों और यहां तक कि सचिव स्तर तक के निजी खातों में भी रकम पहुंचाई गई, जिससे पूरा मूल खाता लगभग खाली हो गया।

नियम बदले गए या तोड़े गए? संयुक्त खाते की व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत राशि का आहरण केवल संयुक्त हस्ताक्षर से ही संभव था, जिसमें सीईओ और बीआरसी की भूमिका तय थी।
लेकिन आरोप है कि इस व्यवस्था को बदलते हुए बीआरसी को हटाकर बीईओ को सेकंड सिग्नेटरी बना दिया गया, जबकि प्रथम हस्ताक्षर सीईओ विनय कुमार सागर का ही बना रहा। इसी बदलाव के जरिए बड़े पैमाने पर चेक जारी कर रकम निकाले जाने की बात सामने आ रही है।

खाता खाली, जिम्मेदारी से दूरी—बयान और दस्तावेजों में विरोधाभास
सूत्रों के अनुसार, संबंधित खाते से भारी निकासी के बाद अब पूरा फंड लगभग खत्म हो चुका है। वहीं वर्तमान पदस्थ अधिकारियों की ओर से यह कहा जा रहा है कि यह लेन-देन उनके कार्यभार संभालने से पहले का है।
लेकिन ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज कथित तौर पर इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं, जिससे मामला और ज्यादा उलझता जा रहा है।

शिक्षा बनाम पंचायत—दो विभाग आमने-सामने
केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न शिक्षा योजनाओं को मिलाकर समग्र शिक्षा अभियान शुरू किया गया था, जिसके तहत पुराने मदों की राशि को वापस लेकर नए ढांचे में उपयोग करना था।
लेकिन अब इस गड़बड़ी के बाद शिक्षा विभाग और पंचायत विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है, जो शासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

जांच की मांग तेज, क्या बड़े नाम होंगे बेनकाब?
करीब 90 लाख रुपये के इस कथित घोटाले ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। अब इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि आखिर इस रकम का वास्तविक उपयोग क्या हुआ और इस पूरे खेल में कौन-कौन शामिल है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला जिले के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में दर्ज हो सकता है।

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