समझाइश के बाद भी बाल विवाह करने पर संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर की कार्यवाही शुरू

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बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत की गई कार्यवाही

जानकारी मिलने पर 1098 पर करें सूचित

बलरामपुर । कलेक्टर श्री राजेन्द्र कटारा के निर्देषन एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्षन में बाल विवाह के रोकथाम हेतु कार्यवाही जारी है। इसी कड़ी में विगत तीन दिवसों में 02 बाल विवाह रोके गए।

इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी ने बताया कि 26 अप्रैल 2025 को विकासखण्ड बलरामपुर के ग्राम खजुरीपारा, पुलिस चौकी गणेश मोड़ क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर महिला एवं बाल विकास विभाग एवं पुलिस विभाग की टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर परिजनों को बाल विवाह न करने की समझाइश दी गई थी।

परंतु इसके बावजूद 03 मई 2025 को पुनः बाल विवाह की सूचना प्राप्त हुई। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए संयुक्त टीम द्वारा जांच की गई। जांच में पाया गया कि बालक के पिता श्री प्रदीप रवि द्वारा ग्राम सिधमा, पुलिस चौकी बरियों में बाल विवाह हेतु बारात रवाना की जा चुकी थी।

यह कृत्य न केवल बाल विवाह को प्रोत्साहित करना है, बल्कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 11 का स्पष्ट उल्लंघन भी है। चूंकि पहले ही समझाइश दी जा चुकी थी, इसके बावजूद कानून का उल्लंघन किया गया। इस आधार पर बाल विवाह में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी एफआईआर दर्ज कराने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है।

इसी प्रकार विकासखण्ड बलरामपुर के ही ग्राम पिपरौल में भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर महिला बाल विकास विभाग एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ग्राम पिपरौल में पहुंचकर बालिका के माता-पिता को बाल विवाह नहीं करने की समझाईश दी गई तथा उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणाम की जानकारी भी दी गई।

जिस पर बालिका के माता-पिता बालिका के बालिक होने के पश्चात विवाह करने के लिए राजी हुए। महिला बाल विकास विभाग अधिकारी ने बताया है कि इस बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कोई व्यक्ति बाल-विवाह करवाता है या इसको बढ़ावा देता है

और या फिर बाल विवाह करवाने में सहायता करता है, तो उसे दो साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने जिले वासियों से अपील की है कि उनके आस-पास किसी नाबालिग का विवाह करवाया जा रहा है तो इसकी सूचना हेल्पलाइन नंबर 1098 पर तुरंत सूचना दें। ताकि दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

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