बाबू जीवनलाल यादव का सरकारी तंत्र पर अवैध साम्राज्य मरवाही में भ्रष्टाचार और कब्जे की शर्मनाक कहानी!

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मरवाही । शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 जीवनलाल यादव पर गंभीर आरोपों की बाढ़ आ गई है। अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर फर्जीवाड़ा करके सरकारी नौकरी हथियाने वाले यादव ने अब सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर ‘राजमहल’ खड़ा कर दिया है। तहसील और एसडीएम कार्यालय से महज़ चंद कदम की दूरी पर स्थित इस आलीशान अवैध निर्माण पर प्रशासनिक आंखों का बंद रहना साफ तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था, लेकिन वहां से भी ‘मैनेजमेंट’ के दम पर मामला वापस करवा लिया गया। सवाल यह है कि जब मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, तो कौन-कौन से बड़े हाथ इसे दबाने में शामिल थे?

यही नहीं, आज की तारीख में जीवनलाल यादव केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने पूरे रिश्तेदारों को भी सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बसाने का खुला खेल खेल रहे हैं। उनके इस खेल में पटवारी, आरआई और क्षेत्रीय अफसरों की भूमिका संदिग्ध है, जो उनकी ‘पहुंच’ और ‘रुतबे’ के सामने घुटने टेकते नजर आते हैं।

शिक्षा विभाग में कोई भी फाइल बिना ‘कमिशन’ के आगे नहीं बढ़ती। बाबू साहब के दरवाजे पर दस्तक दो, रकम चढ़ाओ, तब जाकर फाइल सरकेगी। मरवाही में शिक्षा व्यवस्था अब बाबूजी के घर से ही संचालित हो रही है, और अफसर महज ‘तमाशबीन’ बनकर भ्रष्टाचार के इस नंगे नाच को देख रहे हैं।

लगभग 30-40 सालों से बाबू जीवनलाल यादव का ये साम्राज्य जस का तस बना हुआ है। अब यह सवाल उठता है — कब जागेगा प्रशासन? क्या किसी बड़े हादसे या जनआक्रोश का इंतज़ार है?

यदि अब भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से पीछे हटते हैं, तो यह मान लेना चाहिए कि पूरा सिस्टम एक बाबू के सामने घुटने टेक चुका है।

जनता पूछ रही है – आखिर कब तक चलेगा यह भ्रष्टाचार का महल अब नहीं तो कब कार्रवाई हो – कड़ी और पारदर्शी

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