प्रधान पाठको की पहल : सीखने की ओर नए कदम सेमिनार का आयोजन

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उदयपुर/ सरगुजा उदयपुर ब्लॉक में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से प्रधान पाठक सेमिनार का सफल आयोजन शुक्रवार को सामुदायिक भवन जनपद पंचायत उदयपुर में किया गया। इस आयोजन में विकास खंड शिक्षा अधिकारी रविकांत यादव, विकासखंड श्रोत समन्वयक उषा किरण बखला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत श्री वेद प्रकाश गुप्ता, समस्त संकुल समन्वयक एवं प्राथमिक विद्यालय उदयपुर के सभी प्रधान पाठकों ने सहभागिता की। सेमिनार का आयोजन शिक्षा विभाग, उदयपुर एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान से किया गया। अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से शशांक, विनीता, अंजली, अबूजर एवं अरमान ने सभी प्रधानपाठकों को प्रोजेक्ट कार्य में सहयोग प्रदान किया ।   

सेमिनार में 13 चयनित प्रधान पाठकों ने अपने विद्यालयों में किए गए नवाचारी शैक्षिक कार्यों और प्रभावी प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। प्रमुख प्रोजेक्ट में—पुस्तकालय निर्माण एवं उपयोग,प्रिंट-रिच वातावरण का निर्माण,सुबह की असेंबली में नवाचार,रचनात्मक लेखन एवं अन्य बाल-केंद्रित गतिविधियाँ जैसी महत्वपूर्ण शैक्षिक पहलें शामिल रहीं। इस प्रोजेक्ट के अनुभवों को प्रधान पाठकों ने लेख के रूप में भी लिखा। इन लेखों को जिला स्तर पर प्रकाशित की गयी पुस्तक प्रधान पाठकों की पहल : सीखने की ओर नए कदम में शामिल किया गया। आज इस पुस्तक का विमोचन अधिकारियों के कर कमलों से किया गया।
इस सेमिनार का उद्देश्य इन प्रभावी प्रोजेक्टों को व्यापक मंच पर प्रस्तुत कर अन्य विद्यालयों को प्रेरित करना तथा बच्चों के सीखने के वातावरण को और सशक्त बनाना था। प्रत्येक प्रधान पाठक ने अपने विद्यालय की आवश्यकताओं के अनुरूप एक या अधिक प्रोजेक्ट का चयन कर टीम के साथ मिलकर उन पर कार्य प्रारंभ किया।

इन पहलों का प्रभाव कई विद्यालयों में स्पष्ट रूप से देखा गया। जहाँ प्रधान पाठकों व शिक्षकों ने निरंतरता से प्रयास किए, वहाँ बच्चों की मौखिक एवं लिखित अभिव्यक्ति में सुधार, सीखने के स्तर में वृद्धि, बच्चों की उपस्थिती में सुधार तथा विद्यालय के संपूर्ण वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन दर्ज किए गए। विद्यालयों ने स्वयं को जीवंत और सीखने-केंद्रित स्थानों में परिवर्तित किया।

उदयपुर ब्लॉक के अनेक विद्यार्थी चुनौतीपूर्ण सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों से आते हैं, ऐसे में विद्यालय ही उनके सीखने व विकास का मुख्य आधार बनता है। प्रधान पाठकों ने इन परिस्थितियों को समझते हुए बच्चों के लिए ऐसा माहौल तैयार किया जहाँ वे आत्मविश्वास के साथ सीखें, समझें और अपनी अभिव्यक्ति को विकसित कर सकें। इसके साथ ही सेमिनार के आयोजन में फ़ाउंडेशन की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

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