धरमजयगढ़ में न्याय की जंग: अधिग्रहण जांच अटकी, किसानों पर चला बुलडोजर

4 Min Read

प्रतीक मल्लिक ✍️


🔹 हाइलाइट्स

  • भारतमाला परियोजना में अधिग्रहण और मुआवजा घोटाले की जांच अब तक शुरू नहीं
  • बड़े अफसर और घोटालेबाज सुरक्षित, छोटे किसानों के शेड तोड़े गए
  • हाईकोर्ट में मामला लंबित, किसान न्याय की आस लगाए बैठे
  • कोल माइंस को लेकर भी विवाद की आशंका

केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना विवादों में

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना छत्तीसगढ़ में लगातार सवालों के घेरे में है। मुआवजे में बड़े पैमाने पर घोटाले सामने आए, लेकिन शासन-प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। अभनपुर मुआवजा घोटाले के बाद कार्रवाई तो हुई, परंतु धरमजयगढ़-ऊरगा-पत्थलगांव मार्ग निर्माण में अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया की जांच अब तक ठप पड़ी है। न तो टीम गठित की गई है और न ही जमीन स्तर पर कोई पड़ताल हुई है। इससे प्रशासन की लापरवाही साफ झलकती है।


किसानों पर कार्रवाई, घोटालेबाजों पर चुप्पी

धरमजयगढ़ के मेढ़रमार गांव में हाल ही में सड़क एलाइनमेंट बदला गया। इस बदलाव के कारण कई किसानों के शेड प्रभावित हुए।

  • तहसीलदार ने 28 अगस्त तक शेड हटाने का नोटिस जारी किया।
  • किसान राहत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे।
  • लेकिन हाईकोर्ट से जवाब आने से पहले ही 30 अगस्त को प्रशासन ने जेसीबी चलाकर किसानों के शेड ढहा दिए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने इस कार्रवाई को दिखाकर अपनी पीठ थपथपाई, लेकिन बड़े पैमाने पर हुए अधिग्रहण और मुआवजा घोटाले की जांच पर अब तक चुप्पी साध रखी है।


न्याय की आस में किसान

जिन किसानों के शेड तोड़े गए हैं, वे अब पूरी तरह से हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि यदि कोर्ट किसानों के पक्ष में निर्णय देता है तो उन्हें क्षतिपूर्ति की राशि मिल सकती है। फिलहाल किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और प्रशासन की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बता रहे हैं।


अधिग्रहण जांच पर सवाल

स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब बड़े पैमाने पर मुआवजा प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें हैं, तब तक जांच क्यों नहीं हो रही? केवल छोटे किसानों के शेड तोड़ने से क्या घोटालेबाजों को बचाने की कोशिश हो रही है? प्रशासन का यह रवैया कई सवालों को जन्म दे रहा है।


कोल माइंस का नया विवाद

धरमजयगढ़ क्षेत्र में चार कोल माइंस प्रस्तावित हैं। फिलहाल इनसे संबंधित भूमि की खरीदी-बिक्री पर रोक तो लगा दी गई है, लेकिन निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं देंगे तो यहां भी विवाद और टकराव की पुनरावृत्ति हो सकती है।


धरमजयगढ़ में एक ओर किसान न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन बड़े पैमाने पर हुए अधिग्रहण घोटाले की जांच टाल रहा है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि किसानों को न्याय मिलेगा या वे केवल अन्याय का शिकार बनकर रह जाएंगे।


Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *