पशुधन विभाग के तत्कालीन उपसंचालक पर 41 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप
जांच में सप्लायरों के साथ मिलकर दवा खरीदी में घोटाले की पुष्टि
अंबिकापुर/सूरजपुर: वर्ष 2018-19 में पशुधन विकास विभाग सूरजपुर के तत्कालीन उपसंचालक डॉ. ललन सिंह पर शासकीय राशि की हेरा-फेरी का गंभीर आरोप लगा है। जांच में यह भी सामने आया है कि जीएसटी और सीएसटी की कुल 3,02,298.52 रुपए की राशि की भी चोरी की गई है।
अधिवक्ता डी.के. सोनी द्वारा 9 अगस्त 2019 को की गई शिकायत के बाद की गई जांच में यह प्रमाणित हुआ कि डॉ. ललन सिंह ने जेम पोर्टल के नियमों की अवहेलना करते हुए दो सप्लायरों से दवाइयाँ और उपकरण खरीदी। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ, क्योंकि बिना बिडिंग के उच्च दरों पर दवाइयाँ खरीदी गईं।
जेम पोर्टल के नियमों का उल्लंघन और उच्च दरों पर खरीदी
जांच में पाया गया कि मिनिरल मिक्चर एनआयनिक जैसी दवाइयाँ बाजार दर से तीन गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। इसके अलावा, सप्लायरों द्वारा प्रस्तुत बिलों में जरूरी विवरण, जैसे बैच नंबर और एक्सपायरी तिथि, भी गायब थे। दोनों सप्लायरों के पते और मोबाइल नंबर एक जैसे पाए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों फर्म एक ही व्यक्ति के स्वामित्व में हो सकती हैं।

अनियमितताओं के कारण शासन को हुआ भारी नुकसान
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जेम पोर्टल के माध्यम से केवल दो सप्लायरों से ही दवाइयाँ खरीदी गईं, जबकि अन्य विक्रेताओं से प्रतिस्पर्धी दरों के लिए बिडिंग नहीं करवाई गई। इससे शासन को अत्यधिक आर्थिक क्षति हुई है।
जीएसटी और सीएसटी की चोरी का खुलासा
इसके अलावा, जिंदल जनरल ऑर्डर सप्लायर और नलिन मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवाइयों में जीएसटी और सीएसटी की राशि भी शासकीय खाते में जमा नहीं की गई। इस घोटाले के बाद अब आपराधिक मामला दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
यह पूरी प्रक्रिया दर्शाती है कि डॉ. ललन सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा एक सुनियोजित तरीके से शासकीय राशि की हेरा-फेरी की गई है, जिससे शासन को लाखों रुपयों का नुकसान हुआ है।
