सनातन धर्म आधारित जीवन पद्धति ही  मानवता का सार-जगतगुरु स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ

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गौरेला- कांची कमकोटी पीठ के शंकराचार्य के कृपा पात्र शिष्य श्री चक्र महामेरु पीठाधिपति जगतगुरु स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ ने गौरेला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघ चालक तीरथ प्रसाद बड़गइयाँ  के नूतन गृह प्रवेश कार्यक्रम पर आयोजित एक  विशेष प्रवचन में सनातन धर्म की महानता को बतलाते हुए कहा कि सनातन धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति मानसिक, नैतिक, अध्यात्मिक, और सामाजिक सभी क्षेत्रों में उन्नत होते हुए  सत्य, अहिंसा, आत्मबल और सौहार्द्र का मार्गदर्शक है।उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्म-निर्णयविहीन नहीं रहता और सनातन धर्म के सिद्धांतों—जैसे सत्य, अंतर्यात्रा, और धर्म-निर्धारण—को अपनाता है, वही समाज में सामंजस्य एवं शांति स्थापित कर सकता है।

स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ ने कहा कि अन्य धर्मों व संस्कृतियों के प्रति सम्मान एवं समझ का भाव रखना हिंदुओं की सबसे बड़ी विशेषता है।उन्होंने बल देकर कहा कि हिंदुओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, और राष्ट्र-निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर अपनी सनातनी पहचान जैसे माथे में तिलक अपनी मातृभाषा को अपनाना एवं शाकाहारी भोजन करने का आह्वान करते हुए सनातन धर्म के आदर्श—जैसे “वसुधैव कुटुंबकम्” और “लोकः समस्तः सुखिनो भवन्तु”—को अपने व्यवहार में लाने को ही असली आत्म-साक्षात्कार बताया। इस अवसर पर बड़ी संख्या श्रद्धालु भक्तजन स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

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